India-US Trade में नया तनाव, भारतीय Solar Export पर 126% की भारी-भरकम काउंटरवेलिंग ड्यूटी

By Ankit Jaiswal | Feb 25, 2026

अमेरिका से एक बड़ा व्यापारिक झटका सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारतीय सोलर सेल और मॉड्यूल के आयात पर लगभग 126 प्रतिशत की प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह फैसला 24 फरवरी को घोषित किया गया और इसका असर भारत के तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा निर्यात क्षेत्र पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि यह जांच क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक सेल के आयात को लेकर भारत, इंडोनेशिया और लाओस के खिलाफ शुरू की गई थी। इंडोनेशिया और लाओस के कुछ निर्यातकों पर भी 80 से 140 प्रतिशत तक की प्रारंभिक सब्सिडी मार्जिन तय की गई है।

काउंटरवेलिंग ड्यूटी क्या होती है, इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी देश की सरकार अपने निर्यातकों को सब्सिडी देती है और उससे आयातक देश के उद्योग को नुकसान होता है, तो उस लाभ को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। अब अमेरिकी कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन को निर्देश दिया जाएगा कि फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के बाद इस दर पर नकद जमा वसूला जाए।

इस जांच की मांग एलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड ने की थी, जिसमें कई अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई कंपनियां शामिल हैं। उनका तर्क है कि घरेलू उद्योग में किए जा रहे बड़े निवेश को अनुचित आयात से बचाना जरूरी है।

भारत के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि हाल के वर्षों में अमेरिका भारतीय सोलर उत्पादों का बड़ा बाजार बनकर उभरा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2022 में जहां अमेरिका ने भारत से करीब 232 मिलियन वॉट सोलर आयात किया था, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2.29 बिलियन वॉट से अधिक हो गया। निर्यात मूल्य भी लगभग 84 मिलियन डॉलर से बढ़कर करीब 793 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंची प्रारंभिक ड्यूटी भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में महंगा बना सकती है। इससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है जिन्होंने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के तहत बड़े निवेश किए हैं।

शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा। सोलर कंपनियों जैसे वारी एनर्जीज़, प्रीमियर एनर्जीज़ और विक्रम सोलर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार वारी एनर्जीज का लगभग 29 प्रतिशत और विक्रम सोलर का करीब 16 प्रतिशत राजस्व निर्यात से आता है, जिसमें अमेरिकी बाजार की अहम हिस्सेदारी है।

अब अगला कदम 6 जुलाई 2026 को अपेक्षित अंतिम निर्णय होगा, हालांकि समयसीमा बढ़ाई भी जा सकती है। साथ ही एंटी-डंपिंग जांच भी समानांतर चल रही है और अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग यह देखेगा कि आयात से घरेलू उद्योग को वास्तविक नुकसान हुआ या नहीं।

फिलहाल यह प्रारंभिक फैसला है और संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने तथा सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने का अवसर मिलेगा। अंतिम दरें बढ़ भी सकती हैं या घट भी सकती हैं। लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने भारत-अमेरिका सोलर व्यापार संबंधों पर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है और उद्योग जगत की नजर अब आगे आने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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