कोरोना काल में शिक्षा क्षेत्र को भी उठाना पड़ा है अभूतपूर्व नुकसान

By संजीव राय | Jul 14, 2020

जुलाई का महीना आ चुका है। छात्रों के बोर्ड परीक्षा के परिणाम भी आने लगे हैं। लेकिन इस सवाल का कोई ठीक-ठीक जवाब नहीं दे पा रहा है कि स्कूल कब खुलेंगे ? मई के महीने में लोगों को यह उम्मीद थी कि जुलाई में स्कूल खुल जाएँगे। लेकिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कह दिया है कि दिल्ली में सभी स्कूल, जुलाई के अंत तक बंद रहेंगे। स्कूलों को लेकर रणनीति बनाने के लिए कई राज्यों ने समिति का गठन किया है। इन समितियों के सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़े लोग हैं। यह समितियाँ स्कूल खुलने की संभावित तिथि से लेकर कोविड-19 के कारण स्कूलों में होने वाले बदलाव की रूपरेखा तैयार करेंगी। एनसीईआरटी, सीबीएससी भी अपने स्तर से नियमवाली के अनुसार स्कूलों को निर्देशित करेंगे।

इसे भी पढ़ें: देश की परेशानी बढ़ा रहे हैं वह लोग जो अब भी कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे

इस समय दुनिया के दूसरे देश क्या कर रहे हैं, उनसे हम सीख सकते हैं। जून के पहले हफ्ते में इंग्लैण्ड के कुछ प्राथमिक स्कूलों को खोला गया था। लेकिन डर्बी के एक स्कूल में कार्यरत सात सदस्य संक्रमित पाए गए और फिर स्कूल को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा। फ्रांस में भी पहले कुछ स्कूलों को खोला गया था लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही सत्तर बच्चों के संक्रमित होने की खबर आई थी। इन दिनों वहां अभिभावक स्कूल आने से पहले छात्रों का तापमान लेते हैं। स्कूल आने पर दिन में दो बार छात्रों का तापमान परिक्षण होता है।


छात्रों की पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी रणनीति बनानी होगी। इंग्लैण्ड में स्कूलों के बंद होने के दौरान 'घर पर शिक्षा' का अनुभव बहुत उत्साहवर्धक नहीं रहा है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शिक्षा-संस्थान ने हाल में ही एक अध्ययन किया है। उनका निष्कर्ष है कि स्कूल बंदी के दौरान छात्रों ने घर पर रहते हुए औसतन दो से ढाई घंटे ही स्कूल का कार्य किया है। इंग्लैण्ड में छात्रों के पढ़ाई में हुए नुक्सान की भरपाई के लिए ट्यूशन के द्वारा छात्रों की मदद का प्रस्ताव है। लेकिन इसमें बहुत अड़चनें हैं क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में वहां ट्यूटर की उपलब्धता एक आसान काम नहीं होगा। किस छात्र को क्या अकादमिक सहयोग चाहिए, इसकी पहचान करना भी एक सरल कार्य नहीं है।


दिल्ली सरकार ने स्कूल से लेकर मॉल खोलने के विकल्पों पर नागरिकों और अभिभावकों से राय मांगी थी। कुछ और राज्य सरकारों ने स्कूलों को लेकर अभिभावकों की राय जानने की कोशिश की है। बनारस में एक मान्यता प्राप्त निजी स्कूल के संचालक ने बताया कि मार्च के महीने से ही छात्रों ने आना और फीस देना बंद कर दिया है। ऐसे में स्कूलों के सामने यह संकट है कि वह अपने शिक्षकों को कैसे काम पर बुलाएं ? यदि वह ऑनलाइन शिक्षा का कोई प्रबंधन करते भी हैं तो छात्रों की फीस आएगी इसकी निश्चितता नहीं है। कुछ शहरों में अभिभावक कह रहे हैं कि जब स्कूल चले ही नहीं तो फीस कैसी ? स्कूलों के बंद होने से निजी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट बना हुआ है। कुछ की नौकरी जाने का खतरा है।


स्कूल खुलने से पहले स्कूल को अपना मूल्यांकन करना होगा। तमिलनाडु की ही बात करें तो स्कूली शिक्षा में 13000 से अधिक निजी प्रबंधन वाले स्कूल हैं जिनमें लगभग 39 लाख छात्र नामांकित हैं। क्या यहाँ सभी निजी स्कूल, स्कूल खोलने से पहले संभावित जोखिम का आकलन कर पाएंगे ? छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी प्रबंध कर पाएंगे ? फीस न मिलने की स्थिति में आर्थिक दबाव, कम जगह की उपलब्धता और इंफ्रास्ट्रक्टर की सीमा के बीच यह एक कठिन कार्य होगा।


अपने देश में सरकारी और निजी स्कूल दोनों को ही खुलने से पहले बहुत से बदलाव करने होंगे। सेनिटाइजर और मास्क का इंतजाम करना होगा। तापमान नापने के लिए डिजिटल थर्मामीटर रखना होगा।  प्रत्येक स्कूल का जोख़िम की दृष्टि से अवलोकन करने की ज़रूरत होगी। उसी के अनुसार स्कूल खोलने की योजना को क्रियान्वित करना होगा। कक्षा में बैठक प्रबंधन से लेकर मध्याहन भोजन तक के लिए नए मानक तय करने होंगे। स्कूल में भोजन-पानी के द्वारा संक्रमण न फैले इसका विशेष ध्यान रखना होगा। दिव्यांग छात्र कैसे स्कूल आएंगे, अगर ज़रूरी है तो उनके लिए विशेष प्रबंध करना होगा।

इसे भी पढ़ें: कोरोना काल की इस मुश्किल घड़ी में कमाई और बचत बढ़ाने के शानदार टिप्स

प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के अधिकांश अभिभावक, बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं और वह स्कूल भेजने की जल्दी में नहीं हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए, वह तब तक तैयार  नहीं होंगे जब तक, स्कूल में संक्रमण से बचाव के प्रभावी प्रबंध नहीं हो जाते हैं। स्कूल खुलने से पहले, स्कूली शिक्षा में कार्यरत समस्त लोगों को कोविड-19 के ख़तरे और बच्चों को इस संक्रमण से बचाव के उपायों पर प्रशिक्षित करना होगा।


वैसे स्कूल जब भी खोलने का निर्णय हो, इसमें छात्रों और उनके अभिभावकों की राय ज़रूर ली जाए। सुरक्षा के उपायों के साथ ही स्कूल के भीतर और बाहर, छात्रों के सीखने के लिए नई रणनीति की ज़रूरत भी पड़ेगी। स्कूल बंद रह सकते हैं लेकिन सीखना जारी रहेगा। इस प्रक्रिया में शिक्षक-अभिभावक, छात्रों के साथ मिलकर 'गाइडेड लर्निंग' का भी प्रयास कर सकते हैं। स्कूल जब भी खुलें, उसके पहले निजी और सरकारी दोनों ही तरह के स्कूलों को बदले सन्दर्भ के साथ समायोजन करना होगा।


-संजीव राय 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Assam CM Himanta का बयान, PM Modi के रहते हमारी जीत को कोई दीवार रोक नहीं सकती

Horoscope 15 February 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल

आखिर सेवा तीर्थ से उपजते सियासी सवालों के जवाब कब तक मिलेंगे?

Amit Shah का Rahul Gandhi पर बड़ा हमला, बोले- व्यापार समझौतों पर फैला रहे हैं भ्रम