आय और आर्थिक स्थिति पर हुआ कोरोना महामारी का असर, लोगों पर बढ़ रहा कर्ज का बोझ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 06, 2021

कोरोना महामारी का लोगों की आय और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इससे परिवार के स्तर पर कर्ज बढ़ा है और यह वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 37.3 प्रतिशत पहुंच गया जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में 32.5 प्रतिशत था। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि महामारी की दूसरी लहर के कारण कर्ज का यह अनुपात चालू वित्त वर्ष में और बढ़ सकता है।वास्तव में परिवारिक कर्ज का स्तर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से बढ़ रहा है। इससे पहले, नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू की गयी थी। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 से चार साल में परिवारों परकर्ज का स्तर 7.20 प्रतिशत ऊंचा हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 में यह 30.1 प्रतिशत था, जो 2018-19 में बढ़कर 31.7 प्रतिशत, 2019-20 में 32.5 प्रतिशत और 2020-21 में उछलकर 37.3 प्रतिशत हो गया। परिवार के ऊपर कर्ज में बैंक, क्रेडिट सोसाइटी से लिए गए कर्ज , गैर-बैंकिंग कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों से लिये गये खुदरा ऋण, फसल कर्ज और कारोबार को लेकर लिये गये ऋण शामिल हैं।

इसे भी पढ़ें: देह व्यापार का धंधा छोड़कर, महिला ने मास्क बनाकर शुरू की अपनी नयी जिंदगी

यह बात विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 711 जिलों के लिये बैंकों की तरफ से जमा की प्रवृत्ति के बारे में दी गयी जानकारी से सामने आयी। हालांकि इस साल मार्च 2021 से 62 जिलों में जमा में केवल 38,295 करोड़ रुपये की कमी आयी। यह दूसरी लहर के बावजूद आर्थिक गतिविधियों में पुनरूद्धार को बताता है। दूसरी लहर की शुरूआत में बैंकों से बड़े पैमाने पर जमा राशि निकाली गयी। हालांकि इस प्रवृत्ति में अब कमी आयी है। पिछले साल मार्च से दिसंबर के दौरान 599 जिलों में जमाओं में 11,19,776 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ जबकि 113 जिलों में 1,06,798 करोड़ रुपये की कमी हुई। परिवार पर बढ़ता कर्ज का मतलब है कि उनकी वित्तीय बचत दर, खपत और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ने के कारण कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार बैंक जमा में कमी और इलाज तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी खर्चों से 2021-22 में जीडीपी के अनुपात में परिवार के ऊपर कर्ज और बढ़ सकता है।

भारत की आधी कामकाजी आबादी कर्जदार: रिपोर्ट

क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी (सीआईसी) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि देश की कुल 40 करोड़ कामकाजी आबादी के करीब आधे लोग कर्जदार हैं, जिन्होंने कम से कम एक ऋण लिया है या उनके पास क्रेडिट कार्ड है। ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के मुताबिक ऋण संस्थान तेजी से नए ग्राहकों के लिहाज से संतृप्ति स्तर के करीब पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एक अनुमान के मुताबिक जनवरी 2021 तक भारत की कुल कामकाजी आबादी 40.07 करोड़ थी, जबकि खुदरा ऋण बाजार में 20 करोड़ लोगों ने किसी न किसी रूप में कर्ज लिया है। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में बैंकों ने खुदरा ऋण को प्राथमिकता दी, लेकिन महामारी के बाद इस खंड में वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। सीआईसी के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 18-33 वर्ष की आयु के 40 करोड़ लोगों के बीच कर्ज बाजार की वृद्धि की संभावनाएं हैं और इस खंड में ऋण का प्रसार सिर्फ आठ प्रतिशत है।

प्रमुख खबरें

Kempegowda Airport पर सीमा शुल्क विभाग की कार्रवाई, 70 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त

Gyanesh Kumar मामले में Supreme Court में सुनवाई के दौरान क्या क्या हुआ, वकीलों ने क्या सवाल उठाये? अदालत ने क्या टिप्पणियां कीं?

Vijay फोन में बिजी रहते हैं तो Rashmika का चढ़ जाता है पारा, फिर ऐसे पत्नी को शांत करते है पतिदेव

Supreme Court के नोटिस पर बोले Sambit Patra, देश में स्वतंत्र रूप से काम कर रहीं संस्थाएं