By अभिनय आकाश | Oct 23, 2026
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों की मतदाता सूची में कुछ अजीबोगरीब प्रविष्टियां मिलने के बाद चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्टीकरण जारी किया है। इनमें "राम ने यादव को मारा" और "राम ने शर्मा को मारा" जैसे नाम शामिल हैं। एक मामले में तो मतदाता के पिता का नाम "https://B.Com" दर्ज पाया गया। उत्तर प्रदेश में 11 MLC सीटों के लिए शुक्रवार को होने वाले मतदान से पहले, इलाहाबाद-झांसी ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में ये गड़बड़ियां सामने आईं। इन अजीब प्रविष्टियों को दर्शाने वाली एक सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद चुनाव आयोग को इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने गुरुवार को इन गलतियों को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि 11 निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 14.81 लाख प्रविष्टियों (entries) में से 158 ऐसी प्रविष्टियां मिली हैं, जिनमें असामान्य जानकारी दर्ज थी।
मतदान से पहले, बुधवार को रिनवा ने यह भी स्पष्ट किया था कि 23 अक्टूबर को होने वाले उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनावों में किसी भी योग्य मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि मतदाता सूची में उनके नाम या अन्य विवरणों में छोटी-मोटी लिपिकीय (clerical) या छपाई संबंधी गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने एक बयान में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार लागू किया गया यह प्रावधान, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में लागू होगा।
रिनवा ने बताया कि सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है कि मतदाता सूची में छोटी-मोटी गलतियों की वजह से पात्र मतदाताओं को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि अगर कोई मतदाता मतदान केंद्र पर आता है और पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी को उसके विवरण में कोई लिपिकीय (clerical) या छपाई संबंधी गलती दिखती है, तो सबसे पहले उस मतदाता की पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रिनवा ने स्पष्ट किया कि अगर मतदान अधिकारी इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि आया हुआ व्यक्ति वही मतदाता है जिसका नाम सूची में है। चाहे यह मतदाता द्वारा पेश किए गए वैध दस्तावेजों से पता चले या सूची में दर्ज अन्य विवरणों से तो उस व्यक्ति को वोट डालने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, नाम या अन्य विवरणों में मौजूद छोटी-मोटी लिपिकीय या छपाई संबंधी गलतियों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने जोर देकर कहा कि केवल वर्तनी (spelling) या छपाई की छोटी-मोटी गलतियों की वजह से किसी भी पात्र मतदाता को उसके लोकतांत्रिक मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।