Opposition के हमलों के बीच क्या हटेंगे CEC Gyanesh Kumar? जानिए क्या है प्रक्रिया

By अंकित सिंह | Oct 07, 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर फिलहाल विपक्ष का हल्ला बोल जारी है। जब से इंडियन एक्सप्रेस में चुनाव आयोग को लेकर रिपोर्ट आई थी, उसके बाद से विपक्ष को सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा मौका मिल गया है। विपक्ष लगातार सड़क पर प्रदर्शन कर रहा है। इतना ही नहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने की धमकी दी है। साथ ही साथ लगातार पिछले दो दिनों से राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरा विपक्ष सड़क पर है और प्रदर्शन कर रहा है। विपक्ष साफ तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के जरिए लोगों के नाम काटे जा रहे हैं और भाजपा को जीतने में मदद की जा रही है।  

CEC को हटाने के लिए असल में क्या करना पड़ता है?

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, CEC को पद से उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को। यह कानूनी प्रक्रिया 'जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968' के तहत आती है और इसमें ये कड़े चरण शामिल हैं:

1. केवल वैध आधार
लोकप्रिय न होने वाले नीतिगत फैसलों या राजनीतिक मतभेदों के कारण CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता।

संविधान इन आधारों को सख्ती से दो खास आरोपों तक सीमित करता है:
- साबित हुआ दुर्व्यवहार
- असमर्थता

2. संसद में शुरुआत
इस प्रक्रिया की शुरुआत संसद के सदस्यों (MP) की एक बड़ी संख्या के हस्ताक्षर वाले औपचारिक प्रस्ताव से होनी चाहिए:

लोकसभा: नोटिस पर कम से कम 100 MP के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं।

राज्यसभा: नोटिस पर कम से कम 50 MP के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं।

प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए; उनके पास इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होता है।

3. स्वतंत्र न्यायिक जांच
एक बार स्वीकार हो जाने पर, आरोपों पर तुरंत वोटिंग नहीं होती है। आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक न्यायिक समिति बनाई जाती है।

3. स्वतंत्र न्यायिक जांच
एक बार आरोप स्वीकार कर लिए जाने के बाद, उन पर तुरंत मतदान नहीं किया जाता है। आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक न्यायिक समिति बनाई जाती है।

इस समिति में ये सदस्य होते हैं:
सुप्रीम कोर्ट के एक जज
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस
एक जाने-माने कानून विशेषज्ञ

यह कमिटी औपचारिक जांच करती है और एक रिपोर्ट सौंपती है जिसमें CEC को लगाए गए आरोपों के लिए दोषी या निर्दोष पाया जाता है। अगर कमिटी को गलत व्यवहार या अक्षमता का कोई सबूत नहीं मिलता है, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

4. "स्पेशल मेजॉरिटी" (विशेष बहुमत) से वोटिंग की चुनौती
अगर कमिटी CEC को दोषी पाती है, तो इस प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में वोटिंग होती है। इसे पास करने के लिए हर सदन में अलग-अलग 'स्पेशल मेजॉरिटी' की ज़रूरत होती है:

एब्सोल्यूट मेजॉरिटी (पूर्ण बहुमत): सदन के कुल सदस्यों में से 50% से ज़्यादा का समर्थन।

दो-तिहाई बहुमत: मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का समर्थन।

5. राष्ट्रपति का आदेश

जब दोनों सदन एक ही सत्र में स्पेशल मेजॉरिटी के साथ प्रस्ताव पास कर देते हैं, तभी यह प्रस्ताव भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जो फिर पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।

इसे भी पढ़ें: 'सामान बांध लें, लंबी लड़ाई होगी': CEC के खिलाफ CJP का 10 अक्टूबर को Mega Protest का ऐलान

धारा 16 के तहत सुरक्षा

धारा 16 के तहत सुरक्षा का मतलब है 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 16 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को दी गई कानूनी छूट। यह प्रावधान मौजूदा या पूर्व चुनाव आयुक्तों को नेक नीयत से किए गए किसी भी आधिकारिक काम के लिए सिविल या आपराधिक अदालती कार्यवाही से सुरक्षा देता है। कानून में साफ़ तौर पर कहा गया है कि किसी ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई भी सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जाएगी, जो CEC या EC रहा हो या है, और जिसने अपने सरकारी काम के दौरान कोई काम किया हो, कोई बात कही हो या कोई शब्द बोला हो। यह सुरक्षा इसलिए अहम है क्योंकि यह पद छोड़ने के बाद भी कमिश्नरों को मिलती है। इसे चुनाव से जुड़े सरकारी कामों—जैसे वोटर लिस्ट तैयार करना, चुनाव क्षेत्र की सीमाएं तय करना या चुनाव का शेड्यूल बनाना—के लिए बनाया गया है, ताकि कमिश्नरों को फ़िज़ूल या राजनीतिक मक़सद से किए गए मुकदमों से बचाया जा सके।

प्रमुख खबरें

BRS नेता KTR का Congress पर तीखा वार, Rahul Gandhi को बताया पाखंडी और नेपो किड

YellowDots Talent DPI देशभर के युवाओं के लिए हुआ LIVE

Ukraine पर Russia का भीषण हवाई हमला, 4 बच्चों समेत 19 की मौत

Rosemary Oil vs Minoxidil: बालों की ग्रोथ में क्या सच में असरदार है रोजमेरी तेल