By अंकित सिंह | Sep 21, 2026
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कहा कि वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान कुछ वोटरों को भेजे गए नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। यह स्पष्टीकरण तब आया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख हस्तियों को उनके फ़ॉर्म में गड़बड़ियों के कारण नोटिस भेजे गए।
हालांकि, CEO ऑफिस ने साफ़ किया कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। CEO ऑफिस ने कहा कि सभी संबंधित लोगों को सूचित किया जाता है कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि NCT दिल्ली की वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिना अपनी बात रखने का मौका दिए और उचित, तर्कपूर्ण और अपील करने योग्य आदेश के बिना किसी का नाम नहीं हटाया जा सकता। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इन नोटिसों से कोई अस्तित्व का संकट पैदा नहीं हो रहा है।
वोटर लिस्ट का ड्राफ़्ट उन जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया था जो वोटरों ने बूथ लेवल ऑफ़िसर्स (BLOs) को एन्यूमरेशन फ़ॉर्म के ज़रिए दी थीं। इसे 31 अगस्त को CEO दिल्ली की वेबसाइट पर पब्लिश किया गया था। यह लिस्ट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (AERO) के ऑफ़िस और तय किए गए पोलिंग स्टेशनों पर भी उपलब्ध है।