समय से पहले प्रचार रोकने का चुनाव आयोग का फैसला न्यायोचित नहीं

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 16, 2019

नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के प्रचार की अवधि को कम करने के चुनाव आयोग के फैसले को विपक्षी दलों ने अन्यायपूर्ण बताते हुये आयोग से प्रचार की अवधि में कम से कम आधे दिन की छूट देने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी की अगुवाई में अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को चुनाव आयोग के समक्ष इस मामले में अपना पक्ष रखते हुये कहा कि पश्चिम बंगाल में किसी एक पक्ष की गलती का खामियाजा अन्य सभी पक्षकारों को भुगतना पड़ा है। सिंघवी ने कहा, ‘‘विभिन्न स्रोतों से मिले साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि यह हिंसा भाजपा के लोगों ने की है। इसका खामियाजा अन्य गैर राजग दल क्यों उठायें। चुनाव आयोग से हमें इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है इसलिये हमने अदालत जाने सहित अपने अन्य विकल्प खुले रखे हैं।’’ प्रतिनिधिमंडल में सिंघवी के अलावा कांग्रेस नेता अहमद पटेल, तेदेपा के राज्यसभा सदस्य सी आर रमेश और आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह भी शामिल थे। सिंघवी ने कहा कि आयोग को 17 मई को कम से कम आधे दिन के प्रचार की अनुमति देना चाहिये। 

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सिंघवी ने कहा, ‘‘आयोग ने आज की बैठक में हमें इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला करने का आश्वासन दिया है।’’ इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल में कुछ मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान कराने की सिफारिश करने वाले मुख्य सचिव को पद से हटाने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग विभिन्न राज्यों में एक ही तरह के मामलों में अलग अलग रवैया अपना रहा है। सिंघवी ने कहा कि आंध्र प्रदेश में मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर पुनर्मतदान कराने का आयोग ने फैसला किया, जबकि वास्तव में इसकी कोई जरूरत नहीं थी। वहीं, पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव को जायज सिफारिश करने की सजा दे दी गयी। उन्होंने इसे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुये कहा कि एक मुख्य सचिव के गलत सुझाव को आयोग मान लेता है और दूसरे मुख्य सचिव का स्थानांतरण कर दिया जाता है। सिंघवी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के समक्ष मुंगेर में चार मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान कराने मांग करने के अलावा रायबरेली में पुलिस अधीक्षक पर भाजपा उम्मीदवार का पक्ष लेने की शिकायत करते हुये उक्त अधिकारी का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण करने की मांग की है।

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