By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 26, 2026
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। दो निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच मतभेदों को लेकर विवाद के बीच, निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि दो आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग या उसके आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं थे, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त समेत दोनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी बयान में आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-पुनर्वितरण के आदेश दो निर्वाचन आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए थे।
आयोग ने कहा कि यह आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। आयोग ने कहा कि 27 मई 2026 के अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किया गया था।
दोनों ही मौकों पर आयोग ने सर्वसम्मति से इसकी मंजूरी दी थी। तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या पता चलेगी। बयान में कहा गया, ‘‘एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।
गैर-एसआईआर अवधि के लिए, नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू होने वाले फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।’’ आयोग ने कहा कि निर्वाचन आयोग की सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा और बैठक का विवरण जारी किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को आयुक्तों द्वारा जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के बाद निर्वाचन आयोग का यह दूसरा बयान है।
खबर में कहा गया कि निर्वाचन आयुक्तों संधू और जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों के संबंध में कई मौकों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर को रद्द करने की मांग की थी। निर्वाचन आयोग ने इस मामले में अपना पहला बयान उसी दिन जारी किया था, जिस दिन अखबार ने निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी।
आयोग ने यह भी कहा कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश दिया है कि वे उन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म इकट्ठा करें, जिनका नाम अभी तक नहीं जुड़ पाया है। आयोग ने कहा कि 97 में से 81 मतदाताओं ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 पहले ही भर दिया है। निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर के तहत नोटिस पाने वाले लोगों को, कुछ खास मामलों को छोड़कर, व्यक्तिगत सुनवाई के लिए जाने की जरूरत नहीं है।
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय और विचार संस्थागत चर्चाओं का सामान्य हिस्सा हैं और जोर दिया कि उसके आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।