मध्य प्रदेश में “राइट टू रिकॉल” करने पर निर्वाचन आयोग करवाएगा खाली कुर्सी, भरी कुर्सी का चुनाव

By दिनेश शुक्ल | Jun 26, 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम में एक बार फिर संशोधन होने जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की  कमलनाथ द्वारा अधिनियम में किए गए संशोधनों को शिवराज सरकार पटलने जा रही है। जिसमें प्रदेश की जनता को एक बार फिर यह हक मिल जाएगा कि वह नगर निगमों के महापौरों और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्षों को वापस बुला सकेगें। शिवराज सरकार ने फिर से इसमें संशोधन कर व्यवस्था को लागू करने की मंजूरी दे दी है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के नगर निगम के महापौर और नगर पालिका तथा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के माध्यम से कराने की व्यवस्था लागू की थी। इसके साथ ही जनता को मिला राइट-टू-रिकॉल का वह अधिकार भी छिन गया था, जिसमें उसे महापौर और अध्यक्ष को वापस बुलाने का अधिकार मिला था। इस अधिकार के प्रयोग के लिए तीन चौथाई पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने और उसे विधिसम्मत पाए जाने पर राज्य निर्वाचन आयोग 'खाली कुर्सी, भरी कुर्सी' का चुनाव कराएगा। इसमें खाली कुर्सी के पक्ष में अधिक मतदान होता है तो फिर महापौर या अध्यक्ष को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में संशोधन कर इस प्रावधान को समाप्त कर दिया था। 

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नगर पालिका अधिनियम में संशोधन के बाद कलेक्टर यदि तीन चौथाई पार्षदों के माध्यम से प्राप्त प्रस्ताव को परीक्षण में विधिसम्मत पाता है तो शासन को महापौर या अध्यक्ष को वापस बुलाने के लिए चुनाव कराने की सिफारिश कर सकता है। शासन के प्रस्ताव पर राज्य निर्वाचन आयोग 'खाली कुर्सी, भरी कुर्सी ' का चुनाव कराता है। यदि खाली कुर्सी के पक्ष में जनता मतदान करती है तो संबंधित को पद छोड़ना पड़ता है। महापौर या अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव उनके कार्यरत रहने के दो साल बाद और छह माह शेष रहने से पहले लाया जा सकता है। नगरीय विकास विभाग ने तैयार किया प्रारूप सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सरकार ने पिछली सरकार के जिन फैसलों की समीक्षा कर परिवर्तन करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था, उसे अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग अमलीजामा पहना रहा है। इसके लिए पिछले दिनों मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक लाने की मंजूरी दी गई है। इसके मुताबिक नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने संशोधित विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया है।

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