Prabhasakshi NewsRoom: चुनाव खत्म, महंगाई शुरू, वाणिज्यिक LPG सिलेंडर के दाम में भारी वृद्धि, ATF भी महंगा

By नीरज कुमार दुबे | May 01, 2026

पांच राज्यों के लिए मतदान खत्म होने के ठीक दो दिन बाद मोदी सरकार ने एलपीजी की कीमतों में बड़ी वृद्धि कर दी है, हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गयी है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ यानी विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गयी है, जिससे आने वाले समय में हवाई यात्रा महंगी होना लगभग तय माना जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ये फैसले सामने आए हैं।

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इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई है। हम आपको बता दें कि यह लगातार दूसरा महीना है जब विमान ईंधन महंगा हुआ है। इससे पहले एक अप्रैल को इसमें करीब 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई थी। हालांकि घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू यात्रियों पर तत्काल प्रभाव सीमित रखने की कोशिश की गई है।

इस वृद्धि के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन का मुख्य मार्ग है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर अब विभिन्न ईंधनों की कीमतों में दिखाई दे रहा है।

इसी के साथ मोदी सरकार ने अप्रत्याशित लाभ कर में भी कटौती की है ताकि निर्यात क्षेत्र पर दबाव कम किया जा सके। डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 55.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं एटीएफ पर यह कर 42 रुपये से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य ही रखा गया है। इसके साथ ही डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर को भी इस पखवाड़े के लिए शून्य कर दिया गया है।

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उल्लेखनीय है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की शुरुआत में एलपीजी कीमतों की समीक्षा करती हैं। अप्रैल महीने में भी कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई थी, जब घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 196 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च में भी 114.5 रुपये की वृद्धि की गई थी। ऐसे में मई में कीमतों में और वृद्धि की संभावना पहले से जताई जा रही थी।

इस बीच, सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि को लेकर कई भ्रामक संदेश तेजी से फैलने लगे। जिस पर सरकार ने तुरंत सफाई देते हुए इन दावों को पूरी तरह गलत बताया। पीआईबी की तथ्य जांच इकाई ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दस्तावेज फर्जी है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा है कि फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालने से बचने की कोशिश की जा रही है।

कुल मिलाकर मोदी सरकार और तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देने और वैश्विक दबावों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। जहां एक ओर घरेलू उपभोक्ताओं को सीधे असर से बचाया गया है, वहीं वाणिज्यिक और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में लागत बढ़ने के संकेत साफ हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में इसका व्यापक असर घरेलू बाजार और हवाई यात्रा दोनों पर देखने को मिल सकता है।

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