By नीरज कुमार दुबे | Nov 07, 2025
नगरोटा विधानसभा उपचुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रत्याशी शमीम बेगम के लिए प्रचार करने पहुंचे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तब असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब उनके भाषण के दौरान ही बिजली कट गयी। खास बात यह है कि जम्मू कश्मीर में विद्युत मंत्रालय का कामकाज उमर अब्दुल्ला ही देखते हैं। यानि बिजली मंत्री की जनसभा में ही बिजली कट गयी। इस दौरान मंच पर उमर अब्दुल्ला ने लगभग तीन मिनट तक इंतजार किया ताकि माइक चालू हो जाये और वह भाषण दे सकें लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो वह असहज होकर मंच से उतर कर चले गये और रैली के आयोजकों को फटकार भी लगाई।
लोकतंत्र में वैसे तो नेता जनता के बीच वादों की रोशनी फैलाने आते हैं, लेकिन नगरोटा की यह घटना बताती है कि शब्दों की चमक तब तक प्रभावी नहीं हो सकती, जब तक व्यवस्था की नींव में स्थिरता की रोशनी न हो। बिजली का जाना एक क्षणिक घटना थी, पर इसने यह सच्चाई उजागर कर दी कि जनसेवा का सबसे बड़ा आधार है— भरोसे की निरंतरता। नगरोटा की रैली ने दिखाया कि राजनीति की चमकदार रोशनी के पीछे अंधेरा अब भी मौजूद है। अब यह मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन पर है कि वे इस प्रतीकात्मक अंधेरे को वास्तविक सुधार की रोशनी में कब बदलते हैं।
बहरहाल, अब उमर अब्दुल्ला अपना चुनावी वादा पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह वादा था 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का। उन्होंने कहा है कि लेकिन इसके लिए हम लोगों के घर में मीटर लगाएंगे और जिन लोगों के यहां मीटर नहीं होगा उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।