By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 21, 2026
भारतीय डिजिटल प्रमाणन कंपनी ईमुद्रा ने अपने कुछ डिजिटल प्रमाणपत्र से जुड़ी निजी सुरक्षा ‘कुंजियों’ में गड़बड़ी होने की जानकारी दी है। इन ‘कुंजियों’ का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी असली वेबसाइट की नकल करने वाले फर्जी मंच बना सकते हैं और लोगों को धोखे से भुगतान करने के लिए उकसा सकते हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसी भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) ने एक परामर्श में यह जानकारी दी है।
वेबसाइट को जारी ऐसे प्रमाणपत्र उनकी पहचान की पुष्टि करने में मदद करते हैं। ‘एचटीटीपीएस’ से शुरू होने वाली वेबसाइट पर आम तौर पर ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (टीएलएस) प्रमाणपत्र का इस्तेमाल होता है। यह वेबसाइट और उपयोगकर्ता के ब्राउजर या ऐप के बीच भेजी जाने वाली जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
ईमुद्रा ने अपने बयान में कहा कि इस घटना का भारत में उसके डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) और ई-हस्ताक्षर कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि, कंपनी के वैश्विक टीएलएस कारोबार का एक छोटा हिस्सा प्रभावित हुआ है। सीईआरटी-इन के अनुसार, ईमुद्रा ने बताया कि उसकी सार्वजनिक कुंजी अवसंरचना में आठ मध्यवर्ती प्रमाणन प्राधिकरण प्रमाणपत्रों से जुड़ी निजी सुरक्षा कुंजियों के साथ कुछ गड़बड़ी हुई है।
इनमें छह टीएलएस प्रमाणपत्र और दो सॉफ्टवेयर पर डिजिटल हस्ताक्षर करने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमाणपत्र शामिल हैं। निजी सुरक्षा कुंजी का इस्तेमाल डिजिटल प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने में होता है। यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति ऐसी कुंजी हासिल कर ले, तो वह उसके जरिये फर्जी प्रमाणपत्र बना सकता है।
इससे किसी असली वेबसाइट या भुगतान सेवा की नकल करना संभव हो सकता है। ऐसे में लोग यह समझकर फर्जी वेबसाइट पर भुगतान कर सकते हैं कि वे किसी वास्तविक कंपनी की वेबसाइट पर हैं। ईमुद्रा ने कहा कि उसकी प्रणालियों की सुरक्षा से समझौता नहीं हुआ है, कोई डेटा चोरी नहीं हुआ है और कंपनी के भौतिक तथा डिजिटल सुरक्षा उपाय बरकरार हैं।
कंपनी ने कहा कि प्रभावित वैश्विक टीएलएस कारोबार उसके कुल राजस्व का करीब एक प्रतिशत है। हालांकि, इस घटना से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का जोखिम है, जिसका अभी आकलन नहीं किया जा सकता। ईमुद्रा के अनुसार, वह संभावित रूप से प्रभावित ग्राहकों के संपर्क में है और उन्हें नए प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रही है।
ईमुद्रा ने बताया कि उसके कंप्यूटर तंत्र में एक खामी के कारण मूल मजबूत सुरक्षा कुंजियों के साथ कुछ कमजोर कुंजियां भी बन गई थीं। एक शोधकर्ता ने एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोज़िला को सूचित किया था कि कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से इन कमजोर कुंजियों का पता लगाया जा सकता है। सीईआरटी-इन ने कहा कि इन निजी कुंजियों तक पहुंच रखने वाला हमलावर ऐसे डोमेन के लिए भी फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर सकता है, जिन पर उसका नियंत्रण नहीं है।
इन प्रमाणपत्र के जरिये असली वेबसाइट की नकल की जा सकती है और उनके माध्यम से भेजी जाने वाली जानकारी को बीच में रोकने या उसमें बदलाव करने की कोशिश की जा सकती है। इसे ‘मैन-इन-द-मिडिल’ हमला कहा जाता है। सीईआरटी-इन के अनुसार, गूगल ने प्रमाणपत्र रद्द करने संबंधी सूची (सीआरएलसेट) को अपडेट करके क्रोम में प्रभावित टीएलएस प्रमाणपत्र की सार्वजनिक कुंजियों को रोक दिया है।
गूगल ने ईमुद्रा के उत्पाद ‘ईएमसाइन ईसीसी रूट सीए-जी3’ को क्रोम के विश्वसनीय प्रमाणपत्र भंडार से हटाने की भी घोषणा की है। ईमुद्रा का ‘ईएमसाइन’ मंच वैश्विक स्तर पर डिजिटल प्रमाणन और सार्वजनिक कुंजी अवसंरचना सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसमें एसएसएल और टीएलएस प्रमाणपत्र, ईमेल सुरक्षा, कोड-साइनिंग तथा ‘ईएमसाइन हब’ के जरिये प्रमाणपत्रों के प्रबंधन की सेवाएं शामिल हैं।
मोजिला ने ईमुद्रा के छह प्रभावित टीएलएस मध्यवर्ती प्रमाणपत्र को रोक दिया है। क्रोम के प्रमाणपत्र भंडार पर निर्भर सभी उपकरणों के लिए यह बदलाव 27 अक्टूबर, 2026 को जारी किया जाना निर्धारित है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने डार्क वेब पर उसके 3,897 ग्राहकों के व्यक्तिगत विवरण उजागर होने की आशंका जताई है।
बैंक को इस बारे में अपने खतरा खुफिया सेवा प्रदाता से 16 अक्टूबर को सूचना मिली थी।