New START का अंत: Donald Trump ने छेड़ा नए Nuclear Deal का राग, विनाशकारी हथियारों की दौड़ का बढ़ा खतरा।

By Ankit Jaiswal | Feb 06, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए और आधुनिक परमाणु समझौते की जरूरत पर जोर दिया है। बता दें कि अमेरिका और रूस के बीच आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि न्यू स्टार्ट की अवधि खत्म होते ही ट्रंप ने यह टिप्पणी की, जिससे एक नई वैश्विक हथियार दौड़ की आशंका पर चर्चा तेज हो गई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन लंबे समय से चाहता रहा है कि किसी भी नए परमाणु समझौते में चीन को भी शामिल किया जाए। हालांकि चीन ने सार्वजनिक रूप से इस दबाव को खारिज कर दिया है और कहा है कि उसके परमाणु हथियार अमेरिका और रूस के स्तर के नहीं हैं। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा हालात में वह परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल नहीं होगा।

इस बीच व्हाइट हाउस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि न्यू स्टार्ट की समय-सीमा खत्म होने के बाद अमेरिका और रूस के बीच उसकी शर्तों को अस्थायी रूप से मानने को लेकर कोई आपसी सहमति नहीं है। रूस पहले ही इस संधि के तहत निरीक्षण प्रक्रिया से हट चुका था और अब उसने यह भी कह दिया है कि वह परमाणु हथियारों की संख्या पर किसी सीमा को बाध्यकारी नहीं मानता।

हालांकि परमाणु नियंत्रण को लेकर गतिरोध बना हुआ है, इसके बावजूद ट्रंप ने रूस के साथ कूटनीतिक संवाद दोबारा शुरू किया है। बीते वर्ष उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अलास्का आने का न्योता भी दिया था। हाल ही में अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अबू धाबी में हुई बातचीत के बाद रूस के साथ सैन्य संवाद फिर शुरू करने की घोषणा की है।

परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञों और संगठनों ने चेतावनी दी है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से परमाणु स्थिरता कमजोर होगी। कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका और रूस से अपील की है कि जब तक नया समझौता नहीं होता, तब तक पुरानी सीमाओं का पालन जारी रखा जाए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी इसे दशकों की कूटनीतिक उपलब्धियों के लिए बेहद नाजुक दौर बताया है।

नाटो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रूस की परमाणु भाषा को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए संयम बरतने की अपील की है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि चीन का परमाणु जखीरा भले ही तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन वह अभी भी अमेरिका और रूस से काफी छोटा है। ऐसे में मौजूदा हालात में किसी नए व्यापक परमाणु समझौते की राह आसान नहीं दिखती, लेकिन इसके बिना वैश्विक सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और जोखिम दोनों बढ़ते जा रहे हैं और यही चिंता इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं।

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