By रेनू तिवारी | May 04, 2026
मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने रविवार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सिनेमाई दृष्टिकोण पर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की। कोलकाता के एक प्रतिष्ठित आभूषण ब्रांड द्वारा विशेष सम्मान से नवाजे जाने के बाद, अख्तर ने फिल्म 'धुरंधर' को लेकर चल रहे विवादों और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर पत्रकारों से खुलकर बात की। उनसे हाल में आई ‘धुरंधर’ जैसी कुछ फिल्मों को ‘दुष्प्रचार’ वाली फिल्म करार दिए जाने से जुड़ा सवाल किया गया तो गीतकार ने कहा कि सभी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।
अख्तर ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ‘दुष्प्रचार’ वाली फिल्मों से आपका क्या मतलब है। मुझे ‘धुरंधर’ बहुत पसंद आई, जो एक बेहतरीन फिल्म है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हर कहानी किसी न किसी पक्ष को दर्शाती है, लेकिन क्या कोई कहानी सिर्फ इसलिए दुष्प्रचार बन जाती है क्योंकि उसका कथानक दर्शकों के एक वर्ग के लिए उपयुक्त नहीं है? हर किसी को अपने विचारों को व्यक्त करने का अधिकार है।’’ अख्तर ने कहा कि हर फिल्म निर्माता का काम सच को दिखाना है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के आने वाले परिणाम के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा, ‘‘सरकारें आती-जाती रहती हैं; समाज चलाने के लिए सरकार की आवश्यकता होती है। लेकिन बंगाल सरकारों के लिए नहीं जाना जाता। बंगाल अपने इतिहास और साहित्य के लिए जाना जाता है, जिसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।’’
वर्ष 2014 में, केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के मुद्दे पर टिप्पणी करने का आग्रह किये जाने पर, अख्तर ने कहा कि वहां बदलाव होना तय था। उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी बदलाव अवांछनीय होते हैं और कभी-कभी वांछनीय। मेरा मानना है कि युवा पीढ़ी मेरी पीढ़ी से बेहतर है। वे इस समाज को कहीं बेहतर बनाएंगे।
जावेद अख्तर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में कला और राजनीति के मेल पर तीखी बहस छिड़ी हुई है। उनकी टिप्पणियां न केवल अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करती हैं, बल्कि समाज को चुनावी शोर से ऊपर उठकर सांस्कृतिक मूल्यों पर ध्यान देने का संदेश भी देती हैं।