By अभिनय आकाश | Apr 26, 2025
इस वक्त देश पहलगाम हमले के बाद शोक में है। लेकिन सरकार की कई जिम्म्दारियां हैं। कोर्ट में जिस तरीके से वक्फ संशोधन अधिनियम के मामले में केंद्र सरकार से एक हफ्ते के अंदर मांगा गया था। वो जवाब भी सरकार को इसी मुश्किल घड़ी के बीच देना था। अब आखिरकार केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वक्फ संशोधन कानून को लेकर जो भी सवाल उठाए थे। उसका एक एक कर प्वाइंट बाई बाई जवाब दिया। सुप्रीम कोर्ट का सवाल था कि इतनी पुरानी इमारतें वक्फ के अधीन हैं। सभी का कागज कहां से दिखाए जाएंगे। बहुत मुगल काल के भी इमारत होंगे। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने इस पर कहा कि पिछले 100 साल में उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ को केवल पंजीकरण के द्वारा ही मान्यता दी जाती है। 100 साल से यही नियम चलता आ रहा है। उस पंजीकरण के कागज होंगे।
केंद्र ने स्पष्ट किया कि परिषद में गैर-मुस्लिमों की अधिकतम संख्या 4 (कुल 22 में से) और बोर्डों में 3 (कुल 11 में से) हो सकती है, वह भी अगर सभी पदाधिकारी गैर-मुस्लिम हो। सरकार ने हिंदू धार्मिक न्यासों से संबंधित निकायों और वक्फ बोर्डों के बीच अंतर को रेखांकित किया, और बताया कि वक्फ का दायरा व्यापक है, और इसके तहत कई बार गैर-मुस्लिम संपत्तियां भी आती हैं, इसलिए बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की उपस्थिति संवैधानिक संतुलन को बनाए रखती है। सरकार ने कहा कि कुछ चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए हैं जिनमें वक्फ बोर्डों ने बिना दस्तावेज या सर्वेक्षण के सरकारी भवनों, स्कूलों, और यहां तक कि पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित धरोहरों पर भी वक़्फ़ का दावा कर दिया।
सुनवाई पर आगे का रुख निर्भर
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने पिछली सुनवाई में कहा था कि हमारे पास एक विशेष परिस्थिति है। हमने समझिए खबरों के कुछ खामियों की ओर इशारा किया है और कुछ सकारात्मक बातें भी मानी है। लेकिन हम नहीं चाहते कि अंदर की बात वर्तमान स्थिति इतनी बदल जाए कि इससे पक्षकारों के अधिकार प्रभावित हों। आप सही कह रहे हैं कि सामान्यतः अदालतें कानूनों को स्थगित नहीं करतीं, लेकिन एक और सिद्धांत है कि जब याचिका कोर्ट के सामने पेंडिंग हो. तब वर्तमान स्थिति में ऐसा बदलाव न हो जिससे किसी के अधिकार प्रभावित हों। केंद्र की अंडरटेकिंग के बाद यथास्थिति कायम है लेकिन अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख तय होगा।