By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 30, 2026
पूर्व अर्द्धसैनिक कर्मियों की एक एसोसिएशन ने सरकार से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लगभग उन 400 जवानों को बहाल करने की बुधवार को अपील की, जिन्हें फर्जी कौशल प्रमाणपत्रों के कारण सेवा के दो साल पूरे होने के बाद ही बर्खास्त कर दिया गया था। इन जवानों को रसोइये और जलवाहक के पदों पर भर्ती किया गया था। ये जवान 2023-24 के दौरान केंद्र सरकार की ओर से आयोजित रोजगार मेले के माध्यम से देश के सबसे बड़े सीमा सुरक्षा बल में शामिल हुए थे।
‘द एलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन’ (एएपीडब्ल्यूए) ने यहां संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया और दावा किया कि इन कर्मियों को कोई ‘कारण बताओ नोटिस’ दिए बिना ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। एएपीडब्ल्यूए के अध्यक्ष और सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक एच आर सिंह ने कहा, ‘‘बीएसएफ ने लगभग 400 कर्मियों के कौशल प्रमाणपत्रों को फर्जी पाया। इन युवा जवानों ने जालसाजी नहीं की थी; वे साइबर धोखाधड़ी के शिकार हैं, क्योंकि एक व्यक्ति ने उन्हें भर्ती के समय फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कथित धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ झारखंड पुलिस ने मामला दर्ज किया है।’’ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और बीएसएफ को ‘‘समग्र और मानवीय दृष्टिकोण’’ अपनाना चाहिए तथा इन जवानों को बहाल करना चाहिए, क्योंकि उनके परिवारों की जिम्मेदारी उनके ऊपर है और कुछ पर कर्ज भी है, जिसे उन्हें चुकाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास इन जवानों को बहाल करने का अधिकार है... हम सभी जानते हैं कि नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है और इन कर्मियों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए।’’ बीएसएफ की 135वीं बटालियन से बर्खास्त किए गए कांस्टेबल गौरव कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने और उनके जैसे अन्य कर्मियों ने बेदाग सेवा दी है। उन्होंने कहा कि उनमें से कई को अच्छे खाना पकाने और परोसने के कौशल के लिए उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने पुरस्कृत भी किया था। कुमार ने कहा, ‘‘हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि हमारी नौकरियां बरकरार रखी जाएं, जो हमने अपनी योग्यता के आधार पर हासिल की थीं।
हमने कोई धोखाधड़ी या जालसाजी नहीं की है।’’ एएपीडब्ल्यूए के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि ऐसे फर्जी प्रमाणपत्रों वाले कर्मियों की पहचान होने के बावजूद दो मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें बल में बने रहने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘ये देश के प्रशिक्षित जवान हैं। उन्होंने अपनी दक्षता साबित की है और केवल प्रमाणपत्र में हुई गड़बड़ी के कारण उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।’’ एसोसिएशन ने कहा कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो उसके सदस्य और प्रभावित जवान नौ अक्टूबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देंगे।