By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 07, 2021
मुंबई। अत्यधिक तरलता के बीच सामान्य कर्ज की मांग वांछित स्तर से नीचे रहने के बीच देश के प्रमुख बैंकों ने अपनी आवास ऋण दरों को घटाकर एक दशक के निचले स्तर पर ला दिया है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल हैं। इससे ग्राहकों के पास अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए कर्ज के कई विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। अत्यधिक तरलता की स्थिति के बीच बैंकों में ब्याज दर युद्ध छिड़ा हुआ है। केयर रेटिंग्स के अनुसार पिछले सप्ताह तक बैंकों के पास 6.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी थी। अत्यधिक नकदी से बैंकों का मुनाफा प्रभावित होता है, क्योंकि उन्हें जमाकर्ताओं को इसके लिए ब्याज देना होता है। हालांकि, इसकी ब्याज दर अभी 2.5 प्रतिशत के निचले स्तर पर है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक भी बैंकों से ब्याज दरों में नीतिगत दरों में आई कमी के अनुरूप कटौती के लिए दबाव बना रहा है। मार्च, 2020 से रिजर्व बैंक ने रेपो दर को दो प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, इसके बावजूद ऋण की मांग छह प्रतिशत से कम है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में महामारी की वजह से आवास ऋण की वृद्धि घटी है। इसकी शुरुआत मार्च, 2020 से हो गई थी। जनवरी, 2020 में आवास ऋण की वृद्धि 17.5 प्रतिशत थी, जो जनवरी, 2021 में घटकर 7.7 प्रतिशत रह गई है। मौजूदा परिदृश्य में आवास ऋण बैंकों के लिए सबसे सुरक्षित दांव है। इसमें गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) कम होती हैं। एसबीआई का आवास ऋण एनपीए सिर्फ 0.67 प्रतिशत है। आवास ऋण के मामले में महामारी की वजह से ग्राहक भी लाभ की स्थिति में हैं। संपत्ति के दाम घटे हैं। वहीं कई राज्यों ने स्टाम्प शुल्क भी घटाया है। हालांकि, इसके बावजूद बैंक ऋण के लिए दरों में भिन्नता रख रहे हैं। ग्राहकों को कर्ज देने से पहले उनका ‘क्रेडिट स्कोर’ देखा जाता है। एसबीआई और कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने आवास ऋण की दर घटाकर क्रमश- 6.7 प्रतिशत ओर 6.65 प्रतिशत कर दी है।