हिमाचल में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने में महिला किसानों का अनुकरणीय योगदानः राज्यपाल

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 10, 2022

शिमला  राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि हिमाचल की किसान महिलाएं जिस उत्साह के साथ प्राकृतिक कृषि पद्धति को अपना रही हैं, वह देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण और प्रेरणास्रोत है। राज्यपाल आज सोलन जिले के नौणी में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में विभाग महिलाओं के लिए प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत आयोजित की गई, जिसमें 800 से अधिक किसान महिलाओं ने भाग लिया।

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उन्होंने प्राकृतिक खेती को घर का चिकित्सक बताया क्योंकि प्राकृतिक खेती के उत्पाद स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। उन्होंने कहा कि यह पद्धति नई नहीं है  और यह हमारी पारंपरिक प्रणाली रही है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि राज्य में 1.68 लाख किसान इससे जुड़े हैं और 55 प्रतिशत महिलाएं इस पद्धति से कार्य कर राज्य को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके तहत 25,000 एकड़ भूमि को लाया गया है।

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डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी और वाणिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परविंदर कौशल ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में महिलाओं का अनुभव वास्तव में प्रेरक है, जो इस कृषि पद्धति को और आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के नकारात्मक परिणाम आए हैं पंरतु प्राकृतिक खेती के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। उन्होंने किसानों से इसे पूरी तरह अपनाने का आहवान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किसानों और बागवानों के हित में किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी।

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कृषि सचिव राकेश कंवर ने कहा कि यह कार्यक्रम पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं को समर्पित है, क्योंकि हिमाचल में प्राकृतिक खेती की सफलता का वास्तविक श्रेय महिलाओं को ही जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी प्रकार राज्य सरकार ने भी बजट में 50 हजार हेक्टेयर भूमि को इस कृषि पद्धति के अन्तर्गत लाने, 100 गांवों को प्राकृतिक खेती वाले गांव बनाने, 50 हजार किसानों का प्रमाणीकरण करने और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बेचने के लिए राज्य के हर जिले में दुकानें बनाने का भी प्रस्ताव रखा हैं। उन्होंने कहा कि इस कृषि पद्धति को अपनाने से किसानों की आय में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

 

प्राकृतिक कृषि खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजेश्वर चंदेल ने राज्यपाल का स्वागत किया और तीन दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत जानकारी प्रदान दी। इस मौके पर महिला किसानों ने अपने अनुभव भी साझा किए। जिला सोलन के आतमा परियोजना के निदेशक सुरेंद्र ठाकुर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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