By अनन्या मिश्रा | Aug 10, 2026
कई बार लोगों को चलने-फिरने या फिर बैठने के दौरान तेज दर्द महसूस होता है। यह दर्द पीठ से होता हुआ पैरों तक जाता है। इसमें व्यक्ति को तेज झनझनाहट महसूस हो सकती है। लेकिन इससे रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो सकते हैं। अधिकतर मामलों में इसको मांसपेशियों में होने वाला खिंचाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं एक्सपर्ट की मानें, तो यह दर्द किसी नस के दबने का संकेत हो सकता है।
कमर दर्द आज के समय में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। हालांकि हर कमर दर्द गंभीर नहीं होता। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हे, जांघ, पिंडली और पैर तक फैलने लगे, साथ में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो तो यह नस दबने (Nerve Compression) या साइटिका का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में जल्द जांच कराना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक नस पर दबाव बने रहने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
नस दबना एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की किसी नस पर आसपास की डिस्क, हड्डी, लिगामेंट या मांसपेशियों में एक्स्ट्रा दबाव डालने लगती है। रीढ़ की हड्डी में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। जब नस पर दबाव बढ़ता है, तो यह सामान्य तरीके से दिमाग और शरीर के बीच तक संदेश नहीं पहुंचा पाती है। जिसका परिणाम झनझनाहट, दर्द, सुन्नपन, कमजोरी और कई बार चलने में परेशानी होती है। अगर लंबे समय तक दबाव बना रहता है, तो नस को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
नस का दर्द कमर से लेकर पैर तक फैलता है, तो वहीं मांसपेशियों का दर्द सिर्फ एक हिस्से तक सीमित रहता है।
नस का दर्द होने पर बिजली सी झनझनाहट होती है। वहीं मांसपेशियों का दर्द दबाने पर बढ़ता है।
नस का दर्द होने पर सुन्नपन हो सकता है। लेकिन मांसपेशियों के दर्द में सुन्नपन या झनझनाहट नहीं होती है।
नस के दर्द में जलन महसूस हो सकती है। मांसपेशियों के दर्द जलन महसूस नहीं होती है।
नस के दर्द में पैरों में कमजोरी होती है। मांसपेशियों के दर्द में कमजोरी कम होती है।
नस का दर्द होता है, तो आराम करने के बाद भी यह दर्द कम नहीं होता है। लेकिन मांसपेशियों का दर्द आराम के बाद ठीक होने लगता है।
रीढ़ की डिस्क बाहर निकलकर नस पर दबाव डाल सकती है। इसको नस दबने की सबसे सामान्य वजह माना जाता है।
साइटिका नर्व हमारे शरीर की सबसे लंबी नस होती है। इसके दबने पर दर्द कमर से लेकर पैर तक फैलता है। सामान्य रूप से यह दर्द कमर से पैरों तक जाता है।
बता दें कि उम्र बढ़ने के साथ ही रीढ़ की नलिका संकरी होने लगती है। इससे नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिसकी वजह से पैरों में भारीपन, कमजोरी और दर्द महसूस हो सकती है।
हड्डी का उभार भी सीधे तौर पर तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं रीढ़ की हड्डी या फिर जोड़ों के पास एक्स्ट्रा हड्डी बढ़ती है, तो यह आसपास की तंत्रिकाओं और रीढ़ की हड्डी को दबा सकती है। यह उन पर दबाव डाल सकती है या फिर उनको रगड़ सकती है।
गिरने या शारीरिक चोट लगने से नसों पर दबाव आसानी से दबाव पड़ सकता है। किसी भी तरह की दुर्घटना नसों को खींच सकती है, कुचल सकती हैं या दबा सकती है, सूजे हुए टिशू और आसपास की हड्डियों को उन पर दबाव डालने की वजह बन सकती है।
सबसे पहले डॉक्टर मरीजों के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। फिर शारीरिक और न्यूरोजलॉजिकल जांच की जाती है। वहीं जरूरत होने पर रीढ़ की डिस्क की MRI, सीटी स्कैन, इलैक्ट्रोमायोग्रॉफी और एक्स-रे किया जाता है।
कमर से पैरों तक फैलने वाला तेज, बिजली जैसा या चुभने वाला दर्द सामान्य कमर दर्द नहीं हो सकता है। अगर इसके साथ सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी या चलने में परेशानी हो रही है, तो यह भी नस दबने का संकेत हो सकता है। अगर समय रहते सही जांच और इलाज कराने से ज्यादातर मरीज बिना किसी स्थायी नुकसान के स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के जगह जल्द से जल्द न्यूरोलॉजिस्ट, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या स्पाइन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।