क्या आपको भी ऑफिस पहुंचते ही गुस्सा आने लगता है? सावधान! Masked Hypertension और Mental Stress बिगाड़ सकता है आपकी सेहत

मास्क्ड हाइपरटेंशन का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि तनावपूर्ण जीवनशैली और अत्यधिक स्क्रीन समय रक्तचाप की समस्या को गुप्त रूप से बढ़ा रहे हैं। समय रहते इस अदृश्य बीमारी की पहचान और जीवनशैली में आवश्यक सुधार ही अंगों को होने वाली दीर्घकालिक क्षति से बचा सकते हैं।
आजकल ऑफिस कल्चर में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। एक समय था जब लोगों को ऑफिस में काम करने से रिलैक्शन मिलता था, लेकिन आज के युवाओं में ऑफिस आते ही उन्हें स्ट्रेस फील होने लगता है। वैसे वर्क की टेंशन में कई बार हल्के लक्षणों को ज्यादातर लोल अनदेखा कर देते हैं।
इन लक्षणों में से बीपी एक आम समस्या मानी जा रही है। जानकार के मुताबिक लंबे समय से लैपटॉप पर काम करना, लगातार मानसिक तनाव, नींद की कमी, देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण से 25 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हाई बीपी तेजी से बढ़ रहा है।
हालांकि, टेंशन की बात यह है कि कई लोगों का बीपी डॉक्टर के क्लिनिक में नॉर्मल रहता है, जबकि ऑफिस या काम के दौरान लगातार बढ़ जाता है। इस परिस्थिति को मास्क्ड हाइपरटेंशन कहा जाता है। कई अध्ययनों में पता चलता है कि लोगों में भविष्य में हार्ट अटैक , स्ट्रोक और किडनी रोग का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है।
मास्क्ड हाइपरटेंशन क्या है?
एनसीबीआई के अनुसार, मास्क्ड हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें डॉक्टर के क्लिनिक में ब्लड प्रेशर सामान्य 140/90 mmHg से कम नजर आता है, हालांकि घर, ऑफिस, यात्रा या दैनिक गतिविधियों के दौरान यह लगातार हाई रहता है।
यह 'वाइट कोट हाइपरटेंशन' का उल्टा रुप होता है। जैसे कि क्लिनिक में बीपी बढ़ जाता है लेकिन बाहर सामान्य रहता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा यही है कि सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आता है। इसलिए मरीज को लगता है कि उसका ब्लड प्रेशर बिल्कुल ठीक है, जबकि शरीर के अंदर रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव बना रहता है।
यह सामान्य हाई बीपी से कैसे अलग है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, जो सामान्य हाई ब्लड प्रेशर में व्यक्ति का बीपी हर जगह घर, ऑफिस और क्लिनिक लगातार ऊंचा रहता है। लेकिन मास्कड हाइपरटेंशन सिर्फ रोजमर्रा की परिस्थितियों में बीपी बढ़ता है, जबकि डॉक्टर के पास जाने पर नॉर्मल हो जाता है।
युवाओं में इसके मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
सीडीसी के अनुसार, आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली मास्क्ड हाइपरटेंशन का एक अहम कारण बन सकता है। लंबे समय तक ऑफिस में बैठे रहना, काम की डेडलाइन का दबाव, मोबाइल और लैपटॉप का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, नींद की कमी, अधिक कैफीन, धूम्रपान और पैकेज्ड या प्रोसेस्ड खाना ब्लड प्रेशर पर असर डालते हैं। इन आदतों से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ सकता है। नतीजतन, व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ा रह सकता है, लेकिन घर पर आराम करते समय या डॉक्टर के क्लिनिक में जांच कराने पर यह सामान्य दिखाई दे सकता है। इसी वजह से इसे पहचानना कई बार मुश्किल होता है।
बिना लक्षण के यह कितना खतरनाक हो सकता है?
साइंंस डायरेक्ट के मुताबिक मास्कड हाइपरटेंशन बिना किसी लक्षण के वर्षों तक बना रहता है। इस दौरान लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप धीरे-धीरे धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे हृदय की मांसपेशियां मोटी हो जाती है, स्ट्रोक का खतरा अधिक हो सकता है, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और आंखों की रक्त वाहिकाओं पर भी नजर पड़ती है।
बचाव कैसे करें
- सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करें।
- ऑफिस के समय हर 45-60 मिनट में उठकर चलें।
- नमक का सेवन सीमित करें।
- धूम्रपान और शराब का सेवन से बचें।
- रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें।
- मेडिटेशन और गहरी सांस लेने जैसी तनाव कम करने वाली तकनीकी अपनाएं।
- अगर आप परिवार में हाई बीपी का इतिहास है, तो नियमित तौर पर घर पर ही बीपी जांच करें।
इसे जरा भी हल्के में न लें, ऐसे में डॉक्टर को जरुर दिखाएं।
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