Explained About Nandini Brand | 'नंदिनी' ब्रांड का मालिक कौन है, जो तिरुपति लड्डू के लिए घी की आपूर्ति करेगा | Tirupati Laddu Row

By रेनू तिवारी | Sep 26, 2024

तिरुपति लड्डू विवाद: जिस तरह अमूल या मदर डेयरी जैसे ब्रांड उत्तर भारत में प्रसिद्ध हैं, उसी तरह 'नंदिनी' दक्षिण भारतीय घरों में भी प्रसिद्ध है। 'नंदिनी' कर्नाटक का सबसे बड़ा डेयरी ब्रांड है और आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और गोवा में इसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है। नंदिनी ब्रांड का स्वामित्व कर्नाटक सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (केएमएफ) के पास है, जो गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के बाद भारत में दूसरा सबसे बड़ा डेयरी सहकारी संघ है, जो अमूल का उत्पादन करता है।

नंदिनी उत्पाद बनाने वाली केएमएफ की शुरुआत कैसे हुई? 

कर्नाटक के कोडागु जिले में 1955 में पहली डेयरी कोऑपरेटिव खोली गई। उस समय पैकेटबंद दूध का चलन नहीं था। किसान खुद घर-घर दूध पहुंचाते थे। दूध की कमी भी थी। 1970 के दशक तक दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाने लगा। जनवरी 1970 में दूध क्रांति की शुरुआत हुई, जिसे 'श्वेत क्रांति' कहा गया। विश्व बैंक ने भी डेयरी परियोजनाओं से जुड़ी कई योजनाएं बनाईं।

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डेयरी क्रांति और 'नंदिनी' का जन्म

1974 में, कर्नाटक सरकार ने राज्य में विश्व बैंक की डेयरी परियोजनाओं को लागू करने के लिए कर्नाटक डेयरी विकास निगम (केडीसीसी) की शुरुआत की। एक दशक बाद, 1984 में संगठन का नाम बदलकर कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) कर दिया गया। लगभग उसी समय, कंपनी ने 'नंदिनी' ब्रांड के तहत दूध और अन्य उत्पाद पेश किए, जो जल्द ही कर्नाटक का सबसे लोकप्रिय डेयरी ब्रांड बन गया और पड़ोसी राज्यों में अपनी पहुँच का विस्तार किया।

नंदिनी और अमूल प्रतिद्वंद्वी क्यों हैं?

यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अमूल और नंदिनी प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धी हैं। पिछले साल, जब अमूल ने कर्नाटक के खुदरा बाजार में प्रवेश करने का फैसला किया, तो इसने काफी हंगामा मचाया। कर्नाटक में राजनीतिक दलों ने अमूल पर "दक्षिण में उत्तर भारतीय घुसपैठ" का आरोप लगाया। अमूल बनाम नंदिनी बहस कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने दावा किया कि सहकारी समितियों के बीच हमेशा एक "अलिखित समझौता" रहा है कि जब तक स्थानीय आपूर्तिकर्ता मांग को पूरा करने में असमर्थ न हो, वे एक-दूसरे के बाजारों में प्रवेश नहीं करेंगे।

KMF कैसे काम करता है?

केएमएफ पूरे कर्नाटक में 15 डेयरी यूनियनों का संचालन करता है, जिसमें बेंगलुरु, कोलार और मैसूर सहकारी दूध संघ शामिल हैं। ये संघ गांव-स्तर की डेयरी सहकारी समितियों (DCS) से दूध खरीदते हैं और प्रसंस्करण के लिए इसे केएमएफ को देते हैं। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन की वेबसाइट के अनुसार, केएमएफ 24,000 गांवों के 26 लाख किसानों से रोजाना 86 लाख किलो से अधिक दूध खरीदता है। केएमएफ की एक खासियत दूध आपूर्तिकर्ताओं के लिए इसकी दैनिक भुगतान प्रणाली है, जो मुख्य रूप से छोटे किसान और उत्पादक हैं। फेडरेशन रोजाना 28 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करता है। केएमएफ की 15 इकाइयाँ हैं जो दूध को संसाधित और पैकेज करती हैं, जिसे फिर विभिन्न चैनलों के माध्यम से बेचा जाता है।

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