Explained India-France Relations | Emmanuel Macron का भारत दौरा! नई दिल्ली-पेरिस सामरिक रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह यात्रा?

By रेनू तिवारी | Feb 16, 2026

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों सोमवार देर रात तीन दिन के दौरे पर भारत आएंगे, जिसमें वे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बाइलेटरल मीटिंग करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, मैक्रों का यह दौरा भारत-फ्रांस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के "आपसी भरोसे और गहराई" और दोनों पक्षों के बीच अपने रिश्तों को और गहरा करने के कमिटमेंट को दिखाता है।

डिफेंस सेक्टर: ₹3.25 लाख करोड़ की 'राफेल' डील पर नज़र

फ्रांस वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण 114 राफेल फाइटर जेट्स (4.5 जेनरेशन) की खरीद का समझौता हो सकता है।

मेक इन इंडिया पर जोर: डील के तहत 18 जेट 'फ्लाई-अवे' स्थिति में फ्रांस से आएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

नौसेना की मजबूती: भारतीय नौसेना पहले ही 26 राफेल-M का ऑर्डर दे चुकी है, और इस नई डील से वायुसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

इंडो-पैसिफिक: चीन की चुनौती का मिलकर सामना

दुनिया की कुल GDP का लगभग 60% हिस्सा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से आता है। इस इलाके में चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए भारत और फ्रांस का गठबंधन रणनीतिक रूप से अनिवार्य हो गया है।

फ्रांस की मौजूदगी: रीयूनियन और न्यू कैलेडोनिया जैसे फ्रांसीसी द्वीपों के कारण फ्रांस इस क्षेत्र में एक सक्रिय शक्ति है।

सप्लाई चेन और स्थिरता: दोनों देश मिलकर सप्लाई चेन में विविधता लाने और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा करेंगे।

AI और इनोवेशन: 2026 'ईयर ऑफ इनोवेशन'

मैक्रों की इस यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' है।

तकनीकी सहयोग: प्रधानमंत्री मोदी के साथ मैक्रों इस समिट में हिस्सा लेंगे, जो जिम्मेदार और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दिखाएगा।

ईयर ऑफ इनोवेशन: दोनों नेता मुंबई में 'इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026' का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसका उद्देश्य पूरे साल टेक्नोलॉजी, रिसर्च और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

'होराइजन 2047' रोडमैप

यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 की फ्रांस यात्रा के ठीक एक साल बाद हो रहा है। बातचीत का मुख्य आधार 'होराइजन 2047' रोडमैप होगा, जो भारत और फ्रांस के बीच कूटनीतिक संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने (2047 में) तक के लिए एक दीर्घकालिक खाका तैयार करता है।

इंडो-पैसिफिक की उलझन

मैक्रों के भारत दौरे से नई दिल्ली और पेरिस को इंडो-पैसिफिक में अपना सहयोग और बढ़ाने का मौका मिलेगा, यह एक अहम इलाका है जहाँ चीन लगातार अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन फ्रांस के सपोर्ट से, जिसके इस इलाके में रीयूनियन और न्यू कैलेडोनिया जैसे इलाके हैं, भारत इंडो-पैसिफिक में चीनी मौजूदगी का मुकाबला करना चाहता है।

यहाँ यह ध्यान देना चाहिए कि इंडो-पैसिफिक दुनिया के कुल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का लगभग 60 परसेंट है, और भारत और फ्रांस इस इलाके को सुरक्षित करने और स्थिरता पक्का करने के लिए सप्लाइज़ चेन में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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