By अभिनय आकाश | May 04, 2026
साल 2014 जब यूपी में सुनील बंसल को संगठन महामंत्री बनाकर भेजा गया। उस वक्त उत्तर प्रदेश में एक से एक बीजेपी के साल 2014 नेता की मौजूदगी थी और कोई उनको सुनने वाला नहीं था। फिर एक दिन अमित शाह की प्रदेश में एंट्री होती है। अमित शाह उस वक्त राष्ट्रीय महामंत्री हुआ करते थे। अमित शाह ने तब कहा कि ये जो बोल रहे हैं, समझिए कि अमित शाह बोल रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में रिकार्ड तोड़ जीत दर्ज करते हुए राज्य की 80 में से 73 सीटें जीती। विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी गठबंधन ने 403 सीटों में से 312 सीटों पर जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में भाजपा को शिखर पर ले जाने वाले बंसल को बंगाल के सियासी अखाड़े में ममता बनर्जी के ‘अजेय’ किले को ढहाने की जिम्मेदारी मिली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा को बंपर बढ़त मिली है। बंगाल में पहली बार, भाजपा सरकार का सपना भगवा दल पूरा करता दिख रहा है। बंगाल की जीत में भाजपा के साइलेंट हीरो बने नेताओं की खूब चर्चा हो रही है। शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे बंगाल भाजपा के कई नेताओं ने खूब मेहनत की है, लेकिन दूसरे राज्यों से आए सुनील बंसल ने कुछ महीनों में जमीन तैयार की। होम मिनिस्टर अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। संगठन महामंत्रीसुनील बंसल बीते कई महीने वहां गुजार रहे थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए "डर को दूर भगाओ, भरोसा रखो" का नारा देने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने इस बार ममता बनर्जी के गढ़ में फंसी स्थिति को जीतने के लिए एक रणनीति तैयार की है। संगठन कौशल में माहिर बंसल और चुनाव रणनीतिकार भूपेंद्र यादव, बिप्लब देब और अनिल मालवीय की चौकड़ी ने इस रणनीति को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। उन्होंने स्थिति को इस तरह से बदला है कि अधिकांश एग्जिट पोल में भाजपा ममता बनर्जी के गढ़ को ध्वस्त करती नजर आ रही है।
बंगाल में भाजपा के प्रति उत्साह और बदलाव की संभावना का अंदाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में हुई पहली जनसभा से लगाया जा सकता है। इस रैली ने ममता बनर्जी के माथे पर चिंता की लकीरें ला दीं, क्योंकि कहा जाता है कि जो भी ब्रिगेड ग्राउंड जीतेगा, बंगाल की जीत होगी। पीएम मोदी की रैली में 5 लाख से अधिक लोग जमा हुए। इसके बाद, सह-प्रभारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर, भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीधा अभियान शुरू किया और बंगाली मतदाताओं को उनके द्वारा मां-माती-मानुष के खिलाफ किए गए अत्याचारों की याद दिलाई। इसी तर्ज पर आरजी कर और संदेशखाली हत्याकांड के पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को टिकट दिए गए।
युवाओं और महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित किया गया और युवा कार्ड तथा मातृशक्ति कार्ड योजनाओं के तहत लाखों प्रपत्र भरे गए। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राज्य और केंद्र सरकार द्वारा 640 रैलियां आयोजित की गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 42 संगठनात्मक जिलों को कवर करते हुए 19 रैलियां और 2 रोड शो किए। गृह मंत्री शाह ने 29 संगठनात्मक (23 प्रशासनिक) जिलों को कवर करते हुए 29 रैलियां और 11 रोड शो किए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी चुनाव प्रचार के दौरान लगभग 17 कार्यक्रम आयोजित किए।