पूर्व विधायक राजेशपति त्रिपाठी और ललितेशपति त्रिपाठी पर लगा फर्जी मुकदमा !

By आरती पांडेय | Jul 02, 2021

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 1971-72 में मूल पट्टाधारकों के उत्तराधिकारियों में से कुछ ने 229 बी. के तहत राजस्व रिकार्ड खतौनी में अपना नाम अंकित करवा लिया था। उसके विरुद्ध समिति खुद हाई कोर्ट गई थी। वहां समिति के पक्ष में निर्णय देते हुये अदालत ने 229 बी. में दर्ज सभी नाम अवैध ठहराये और हटा दिये। जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि ऐसे सभी अवैध कब्जे खाली करा कर समिति के अधीन सौंपे जाए। 

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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रतिष्ठित त्रिपाठी परिवार ने एक इंच भी जमीन पर न तो विधि विरुद्ध कोई कब्जा किया है और ना कोई विधि विरुद्ध काम। भूमि गोपालपुर सहकारी समिति लि. की है जिसे वर्ष 1951 में तत्कालीन जमींदार अमरेश चंद्र और नरेश चंद्र ने पंजीकृत इस्तमरारी पट्टे के माध्यम से समिति सदस्यों को बेचा, जिसे उसी वर्ष गोपालपुर संयुक्त सहकारी कृषि समिति लिमिटेड नाम की सोसायटी में समाहित किया गया था। वह समिति एवं भूमि आज तक पूर्ण विधिसम्मति ढंग से यथावत है, जिसका लगान हर वर्ष समिति सरकार को देती है। सहकारिता की स्थापित विधियों के अनुरूप समिति का चुनाव हमेशा सरकारी पर्यवेक्षक के सामने होता है और सरकारी सहकारी विधान के मानकों पर काम करती रही है।

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