By अभिनय आकाश | Aug 30, 2024
बशीर भद्र साहब का एक शेर है- दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हों..
जातिय जनगणना पर कंगना का नया बवाल
किसानों पर बयान देकर विपक्ष के निशाने पर आई कंगना ने तो जैसे बीजेपी के सब्र का इम्तिहान लेने की कसम खा ली है। मंडी से सांसद कंगना ने अब जाति जनगणना पर बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद कंगना रनौत से पूछा गया क्या देश में जाति जनगणना होनी चाहिए। कंगना रनौत ने जवाब दिया नहीं, देश में जातिय जनगणना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि करनी ही क्यों है? क्यों पता करनी हैं जाति? मेरे आस पास जाति जैसा कुछ है नहीं। जातियों के बारे में बहुत लोग नहीं सोचते। जातिय जनगणना की मांग पर फ्रंट फुट पर चल रही कांग्रेस को इस बयान से बूस्टर मिला और उसने कल से बीजेपी को ओबीसी विरोधी बताना शुरू कर दिया। कांग्रेस ने कहा कि कंगना के बयान से साफ लगता है कि बीजेपी जातिय जनगणना कराने के मूड में नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर जेडीयू ने बीजेपी का बचाव करते हुए कहा कि कंगना बीजेपी की प्रवक्ता नहीं हैं।
जेपी नड्डा ने एक हफ्ते में 2 बार बुलाकर क्या समझाया
कंगान रनौत ने दैनिक भास्कर को एक इंटरव्यू दिया और उसमें कहा कि किसान आंदोलन में जो आंदोलनकारी थे उनके ऊपर कई सारे सनसनीखेज आरोप लगाए। उसको लेकर हरियाण से लेकर पूर पंजाब में रोष पैदा हुआ। किसानों का क्रोध और हरियाणा में चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने बिना क्षण गवाए कंगान के बयान से दूरी बना ली। कंगना को चेतावनी भी दी। बीते दिनों कंगना ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। जेपी नड्डा ने उन्हें कई नसीहतें दे दी। बताया जा रहा है कि जेपी नड्डा ने कहा कि अगर आपको बात करनी ही है तो आपको अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में बात करनी चाहिए। वहां के मुद्दे उठाने चाहिए और वहां की परेशानियों के बारे में बात करनी चाहिए। जेपी नड्डा ने कहा कि आप अपने क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बात करें। लेकिन ऐसी बातें जो कि नीतिगत मुद्दे हैं और जिन पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में फैसला होता है या ऐसे मुद्दे जो कहीं न कहीं सरकार से जुड़े हों, उन बातों या मुद्दों पर बयान ना दें। आप सांसद जरूर हैं, लेकिन नीतिगत मामलों पर अधिकृत नहीं हैं। न ही इन मामलों पर आपको बोलने की अनुमति है। साफ सी बात है कि बीजेपी कंगना के बयान को लेकर काफी सजग हो गई है और अपने फायदे और नुकसान देख रही है।
बोलो तभी जब मौन से बेहतर हो
जब किसान नेताओं को लेकर इस तरह के बयान दिए जाते हैं और उस पर रिएक्शन देखे जाते हैं। ऐसे समय में बीजेपी ने कंगना को समझाने की कोशिश फौरन शुरू कर दी। पहले तो बीजेपी ने अपने सांसद कंगना रनौत की ओर से किसान आंदोलन पर दिए बयान से किनारा कर लिया। दरअसल, पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले किसी तरह का विवाद नहीं चाहती थी। लेकिन जिस अंदाज में कंगना के बयान से किनारा किया गया, उसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा गर्म है। पार्टी ने इसके लिए जारी बयान में जिस तरह से तल्ख और सख्त शब्दों का प्रयोग किया और कंगना को चेतावनी दी, उससे माना गया कि BJP उनके लगातार दिए जा रहे बयानों से परेशान है और एक ही उन्हें संदेश दे दिया गया कि वह अपनी सीमा में रहें और पार्टी लाइन से हटकर बयान न दें। जब कंगना को लोकसभा का टिकट मिला था तब भी पार्टी के अंदर उनके बयानों को लेकर चिंता थी। लेकिन अब जब वह सांसद चुन ली गई हैं, पार्टी उनके बयानों को लेकर हमेशा आशंकित रहती है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इसके साथ ही दूसरे बड़बोले नेताओं को भी संदेश दे दिया गया कि वे संयमित होकर बोलें।
क्या नीतियां बनेगी और संसद में क्या प्रतिनिधित्व कर पाएंगे ये लोग?
जाति जनगणना पर सवाल पूछा गया तो कंगना कहती हैं क्यों जाननी है जाति, क्या हो जाएगा इससे? सामाजिक समरसात और जाति धर्म से ऊपर उठना ही उनका आचार विचार है तो ये भी सही है। लेकिन ये वही कंगना है जिन्होंने करनी सेना के विरोध पर खुद को राजपूत बताते हुए कहा था कि कमर नहीं हिलाती, हड्डियां तोड़ती हूं। ये वही कंगना है जिनके लिए योगी जी ने कहा था कि तुम्हारा हमारा खून एक है। मतलब साफ है जहां पर कंगना को सपोर्ट चाहिए वहां जाति गिना दी। जहां पिछड़े, वंचित और शोषित लोगों के हाथ मजबूत होने की बात आई वहां पर आप सांसद हैं लेकिन वहां हिचकिचाने लगी। सोने पर सुहागा ये है कि अगर पत्रकार को सांसद को ये समझाना पड़ रहा है कि गरीब, दलित, आदिवासी समाज के अपने क्या चैलेंज हैं। उन पर ही ज्यादतियां, नीतिगत रूप से उन्हें कैसे आगे लाना है तो क्या नीतियां बनेगी और संसद में क्या प्रतिनिधित्व कर पाएंगे ये लोग? कहा जाता है कि बीजेपी जब भी राह भटकती है संघ उसे रास्ता दिखाती है। संघ मतलब शालीनता, संघ मतलब सुचिता, संघ मतलब अनुशासन, संघ मतलब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ये वो हीरे हैं जो संघ की खुदाई से निकले हैं। संघ का असर बीजेपी पर साफ दिखता भी है और उसके अनुरूप अनुशासन का भी अहम योगदान है। मोदी जी मोदी जी कहकर चुनाव लड़ना और जीत जाना एक बात है और पत्रकारों के घुमावदार सवालों पर बड़बोलेपन में कुछ भी बोल जाना अलग बात है। ऐसे में कंगना से पहले बीजेपी ये बात समझ गई और उन्हें टॉनिक भी दी गई। लेकिन दवाई मिलने और उसका असर होना वक्त तो लगता ही है।
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