By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 06, 2026
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेतृत्व ने शुक्रवार को यहां विधायकों के एक समूह के साथ बैठक के बाद एकजुटता का प्रदर्शन किया और जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज कर दिया। नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की टूट की अटकलों को ‘‘निराधार अफवाह’’ बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है तथा ‘‘कभी नहीं टूटेगी।’’ नेकां नेतृत्व ने शुक्रवार सुबह यह बैठक मंत्रिपरिषद में शामिल न किए जाने से कथित तौर पर असंतुष्ट पार्टी विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए आयोजित की थी।
बैठक के लिए पार्टी के लगभग 15 विधायक यहां गुपकार स्थित अब्दुल्ला परिवार के आवास पर पहुंचे थे। बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सभी 15 विधायक की मौजूदगी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘बिना आधार यह अफवाह फैलाई जा रही है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस गुटों में बंट गई है, जो पूरी तरह से गलत है।’’
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘यह पार्टी एकजुट और संगठित है। और जो लोग सोचते हैं कि वे इस पार्टी को रोक सकते हैं तो यह पार्टी न तो कभी टूटी है और न ही कभी टूटेगी, इंशाल्लाह।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने असंतुष्ट विधायकों से बात की। ‘‘उनकी चिंताएं वाजिब हैं, और उन पर बहुत गहराई से विचार किया गया। सभी की बात सुनी गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इंशाल्लाह, पार्टी और सरकार को मजबूत करने के लिए कुछ कदम तुरंत उठाए जाएंगे, जबकि अन्य कदम धीरे-धीरे उठाए जाएंगे।’’ नेकां अध्यक्ष ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की लड़ाई के साथ-साथ ‘‘अनुच्छेद 370 और 35ए के लिए संघर्ष जारी रहेगा... और इसे इसकी तार्किक परिणति तक पहुंचाया जाएगा।’’
असंतुष्ट विधायकों में से एक, नजीर गुरेजी ने कहा कि विधायक समय-समय पर अपनी समस्याओं को लेकर नेतृत्व के पास पहुंचते हैं। गुरेजी ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले हम एक जगह साथ बैठे थे, और वहीं से सोशल मीडिया पर इसे इस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया जैसे मानो नेकां से एक अलग गुट बन गया हो। कोई अलग गुट या पार्टी नहीं बनी है।’’ उन्होंने कहा कि कुछ मसले थे जिन्हें विधायकों ने मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के सामने रखा। गुरेजी ने कहा, ‘‘उन्होंने हमें राजनीतिक मामलों और अन्य मुद्दों को लेकर आश्वासन दिया है।
कुछ मुद्दों का तुरंत समाधान किया जाएगा, और अन्य पर धीरे-धीरे काम किया जाएगा।’’ यह घटनाक्रम छह बार के विधायक मुबारक गुल सहित कई वरिष्ठ नेताओं के बीच 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ते असंतोष की पृष्ठभूमि में आया है।
उस विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जिससे मंत्रिपरिषद की संख्या नौ की अधिकतम स्वीकार्य वैधानिक सीमा तक पहुंच गई। असंतोष व्यक्त करने वाले विधायकों ने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष कई संगठनात्मक और प्रशासनिक चिंताएं उठाई थीं तथा अपनी बात रखने के लिए औपचारिक मुलाकात का समय मांगा था।