By अभिनय आकाश | Apr 11, 2026
एक महिला कॉन्स्टेबल की गवाही ने तमिलनाडु के नौ पुलिस वालों को मौत की सजा दिलवा दी। जब कोई भी पुलिस के खिलाफ बोलने से डर रहा था, तब उन्होंने अदालत से कहा कि सर, मैं आपको सब कुछ बताऊंगी। यह कहानी है तत्कालीन हेड कॉन्स्टेबल एस रेवती की बहादुरी और उनकी गवाही की। जिन्होंने धमकियों और सिस्टम के दबाव की परवाह किए बगैर तमिलनाडु के नौ पुलिसकर्मियों को सजाए मौत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह भारत के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में एक बेहद रेयर फैसला है क्योंकि एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक 1999 से 2023 के बीच भारत में पुलिस कस्टडी में करीब 2250 लोगों की मौत हुई है। लेकिन इन सब एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक 1999 से 2023 के बीच भारत में पुलिस कस्टडी में करीब 2250 लोगों की मौत हुई है। लेकिन इन सब में कन्विक्शन कितने हुए? सिर्फ तीन वो भी सिर्फ 2017 में। उसके बाद 2018 से 2023 तक छ साल लगातार कन्विक्शन की संख्या शून्य रही। तो इसका मतलब यह है कि भारत में कस्टडी में कोई मर जाए तो दोषी पुलिस वालों को सजा मिलना लगभग नामुमकिन है। लेकिन सत्तनकुलम केस में ऐसा नहीं हुआ।
मगर पुलिसकर्मियों में से ही एक हेड कास्टेबल रेवती इस केस में अप्रूवर बन गई। यानी वो सरकारी गवाह जो आरोपी या अंदरूनी व्यक्ति होते हैं मगर न्याय के लिए कोर्ट में अन्य आरोपियों के खिलाफ गवाही देते हैं। इसके बाद रेवती ने मैजिस्ट्रेट के सामने पूरी घटना पर अपना बयान दर्ज कराया। वह भी तब जब उन्हें अपनी खुद की सुरक्षा और अपने परिवार की सेफ्टी या अपनी नौकरी को लेकर कोई भरोसा नहीं था। क्योंकि केस के आरोपी उनसे सीनियर और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी थे। जबकि रेवती एक जूनियर कांस्टेबल थी हेड कॉन्स्टेबल। फिर भी वो अपने फैसले पर अडिग रही। रिपोर्ट के मुताबिक जब जुडिशियल मैजिस्ट्रेट एमएस भर्ती दासन जांच के लिए पहुंचे तो रेवटी ने उनसे कहा सर मैं आपको सब कुछ बताऊंगी हर एक चीज बारीकी से। वो सच्चाई जो छुपाई जा रही है। फिर मैजिस्ट्रेट के सामने रेवती ने एक के बाद एक 1 मिनट दर मिनट उस रात की पूरी घटना बताई। उन्होंने बताया कि कैसे जयराज और बेनिक्स को लगातार पीटा गया। उन्हें कई चोटें आई और बाद में उन्हें जुडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया। कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई। रेवती ने बिना किसी डर के सीसीटीवी फुटेजेस में दिख रहे दोषी पुलिस वालों की पहचान की जिससे यह साबित करने में मदद मिली कि वो घटना के वक्त मौके पर मौजूद थे।
अब जाकर 6 साल बाद सीबीआई की जांच 2000 पेज की चार्जशीट 100 से ज्यादा गवाहों की गवाही के बाद मदुरई के फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के जज जी मुथू कुमारन ने सभी नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में रखा और फांसी की सजा सुनाई। साथ ही परिवार को ₹1 करोड़ 40 लाख का मुआवजा देने का आर्डर दिया। 10वां आरोपी सब इंस्पेक्टर पालदुरई ट्रायल के दौरान कोविड से ही मर चुका था। जज ने कहा जहां ताकत है वहां जिम्मेदारी होनी चाहिए। जो लोग कानून की रक्षा करने के लिए तैनात थे उन्होंने खुद कानून तोड़ा है।