By Ankit Jaiswal | Aug 07, 2026
फुटबॉल की दुनिया में इस समय फीफा के भीतर बड़ा विवाद चल रहा है। फीफा अध्यक्ष जियानी इंफैन्टिनो ने विश्व कप से जुड़े कमर्शियल अधिकारों में हिस्सेदारी बेचने की योजना वापस लेने के बाद माफी तो मांग ली है, लेकिन इसके बावजूद यूरोप का फुटबॉल संगठन यूईएफए अपने रुख पर कायम है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यूईएफए का कहना है कि उसकी सभी शर्तें पूरी होने तक विश्व कप समेत फीफा की प्रतियोगितियों के बहिष्कार का विकल्प खुला रहेगा।
हालांकि यूईएफए इस जवाब से संतुष्ट नहीं है। संगठन का कहना है कि सिर्फ योजना वापस लेना काफी नहीं है। उसका मानना है कि फीफा को यह भी भरोसा देना होगा कि भविष्य में विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं के कमर्शियल अधिकारों को निजी निवेशकों के हाथों में देने की कोशिश दोबारा नहीं होगी। यूईएफए ने यह भी दोहराया कि उसे अब जियानी इंफैन्टिनो के नेतृत्व पर पहले जैसा विश्वास नहीं रहा है।
गौरतलब है कि विवाद की शुरुआत उस प्रस्ताव से हुई थी, जिसमें विश्व कप के कमर्शियल अधिकारों से जुड़ी नई इकाई में हिस्सेदारी बेचकर बड़ी रकम जुटाने की योजना बनाई गई थी। इस प्रस्ताव का दुनिया के कई प्रमुख फुटबॉल संगठनों ने विरोध किया। बढ़ते दबाव के बाद फीफा को आखिरकार यह योजना वापस लेनी पड़ी।
इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के संगठन फिफप्रो ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने फीफा अध्यक्ष पर अपने पद के अधिकारों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है। वहीं इंग्लैंड फुटबॉल संघ ने भी इंफैन्टिनो के अगले कार्यकाल के समर्थन से हाथ खींच लिया है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस विवाद को खेल प्रशासन में बड़े सुधार की जरूरत का संकेत बताया है।
दूसरी ओर अफ्रीका फुटबॉल महासंघ ने जियानी इंफैन्टिनो का खुलकर समर्थन किया है। महासंघ के अध्यक्ष पत्रिस मोत्सेपे ने कहा कि उनकी कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से फीफा अध्यक्ष के समर्थन की पुष्टि की है और अफ्रीकी फुटबॉल के लिए उनके योगदान की सराहना की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, उत्तरी अमेरिका के फुटबॉल संगठन और एशियाई फुटबॉल परिसंघ ने भी पहले इस निजी निवेश योजना पर आपत्ति जताई थी। वहीं फीफा के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विवाद बढ़ने के बाद इस प्रस्ताव से दूरी बना ली थी।
अब पूरी नजर इस बात पर है कि फीफा और यूईएफए के बीच आगे क्या बातचीत होती है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है तो विश्व फुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतियोगिताओं पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल फीफा संगठन में नेतृत्व और पारदर्शिता को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।