FIFA World Cup 2026 | अरब देशों का अरबों का निवेश हुआ फेल! रोनाल्डो-नेमार को खरीदने वाले खाड़ी देश फ्लॉप, अफ्रीका के छोटे देशों ने मचाया धमाल

By रेनू तिवारी | Jun 29, 2026

खेल जगत के सबसे बड़े मंच, फुटबॉल विश्व कप में एक बार फिर यह साबित हो गया है कि अंधाधुंध पैसा और बड़ी रकम सफलता की गारंटी नहीं बन सकते। सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी (Gulf) देशों ने पिछले कुछ वर्षों में फुटबॉल के बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्टार खिलाड़ियों पर पानी की तरह पैसा बहाया है, लेकिन मौजूदा विश्व कप में उन्हें बेहद शर्मनाक हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है। इसके विपरीत, बेहद सीमित संसाधनों वाले अफ्रीकी देशों ने अपने शानदार खेल से दुनिया को हैरान कर दिया है।

उसने 2034 में होने वाले विश्व कप की मेजबानी भी हासिल की लेकिन अमेरिका में खेले जा रहे टूर्नामेंट में उसके प्रदर्शन को देखते हुए स्पष्ट हो गया कि उसे अब भी काफी लंबा सफर तय करना है। चार साल पहले विश्व कप की मेजबानी करने वाला कतर भी महज तीन मैचों के बाद वापस लौट रहा है। यही हाल अन्य खाड़ी देशों ईरान और इराक का भी है।

मौजूदा विश्व कप में जहां अफ्रीकी महाद्वीप की 10 में से नौ टीम नॉकआउट राउंड में पहुंची वहीं खाड़ी देश अपनी छाप छोड़ने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं। अफ्रीकी देशों के पास खाड़ी देशों की तरह फुटबॉल पर अंधाधुंध खर्च करने के लिए साधन नहीं हैं। केप वर्दे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ ने सऊदी अरब की 1994 के बाद पहली बार ग्रुप चरण से आगे बढ़ने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उसने तीन मैच में दो ड्रॉ खेले और अपने ग्रुप में चौथे स्थान पर रहकर बाहर हो गया।

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सऊदी अरब के कोच जॉर्जोस डोनिस ने कहा, ‘‘यह प्रदर्शन हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं था क्योंकि जब हम अपने लगभग समान स्तर की टीम के खिलाफ मैच में खेलते हैं, तो हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं होता। इसलिए यह चिंता का विषय है।’’ कतर ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैच के आखिर में बराबरी का गोल दागकर विश्व कप में पहली बार अंक हासिल किया लेकिन उसे अपने बाकी दो मैच में हार का सामना करना पड़ा। कतर हालांकि एक अंक हासिल करके ही संतुष्ट नजर आया।

कतर के कोच जुलेन लोपेटेगुई ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इससे पता चलता है कि कम से कम हम इस तरह के मैचों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। हम फुटबॉल में अपने भविष्य को लेकर निश्चित रूप से आशावादी हैं।’’ ईरान 1978 से विश्व कप में खेल रहा है। अमेरिका के साथ युद्ध के कारण यात्रा और वीजा संबंधी परेशानियों के बावजूद उसने अपने तीनों मैच ड्रॉ कराए और वह नॉकआउट में जगह बनाने से मामूली अंतर से चूक गया।

विश्व कप में सात बार भाग लेने के बावजूद यह टीम कभी भी ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। इराक पर भी यही बात लागू होती है, जिसने 40 साल के अंतराल पर विश्व कप में दो बार उपस्थिति दर्ज कराई। ऐसे समय में जब 48 टीमों वाले विश्व कप में केप वर्दे और कांगो जैसे देशों के पास इतिहास रचने के अवसर हैं, खाड़ी देश अभी भी अपने पल का इंतजार कर रहे हैं।

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