By अभिनय आकाश | Aug 09, 2021
विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि चीन के उत्सर्जन में बड़ी कटौती के बिना दुनिया जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई नहीं जीती जा सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि 2030 में उसके यहां कार्बन उत्सर्जन चरम पर होगा और फिर नीचे आएगा, वह कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने (कार्बन न्यूट्रालिटी) के लक्ष्य को 2060 तक प्राप्त करेगा। हालांकि राष्ट्रपति शी ने यह नहीं बताया है कि चीन इस अत्यंत महत्वाकांक्षी लक्ष्य को कैसे प्राप्त करेगा। जहां लगभग सभी देश अपने उत्सर्जन को कम करने में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, वहीं चीन सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। चीन का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अमेरिका के मुकाबले लगभग आधा है, लेकिन इसकी विशाल 1.4 अरब आबादी और विस्फोटक आर्थिक विकास ने इसे अपने समग्र उत्सर्जन में किसी भी अन्य देश से आगे लाकर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के उत्सर्जन को कम करना संभव है, लेकिन इसके लिए आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता होगी। कोयला दशकों से देश की ऊर्जा का मुख्य स्रोत रहा है।
सिंघुआ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि 2050 तक 90% बिजली परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा से आनी चाहिए। उस लक्ष्य की ओर बढ़ने में, सौर पैनल और बड़े पैमाने पर बैटरी जैसी हरित प्रौद्योगिकी के निर्माण में चीन की अगुवाई एक बड़ी मदद हो सकती है। चीन ने सबसे पहले हरित प्रौद्योगिकियों को वायु प्रदूषण से निपटने के साधन के रूप में अपनाया, जो कई शहरों के लिए एक गंभीर समस्या है। लेकिन सरकार यह भी मानती है कि उनके पास भारी आर्थिक क्षमता है, लाखों चीनियों के लिए रोजगार और आय प्रदान करने के साथ-साथ विदेशी तेल और गैस पर चीन की निर्भरता को कम करना। चीन पहले से ही वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का नेतृत्व कर रहा है," ओवरसीज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के यू काओ कहते हैं। दुनिया भर के नेता और जलवायु परिवर्तन पर ठोस कदम उठाने की वकालन करने वाले 26वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी) के लिए नवंबर में ग्लासगो में एकत्र होंगे। इस सम्मेलन में सभी देश एकजुट होकर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और जलवायु परिवर्तन में धरती के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रोके रखने पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे, ताकि जलवायु परिवर्तन के भीषण परिणामों से बचा जा सके।