By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 19, 2026
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 19 सितंबर ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) ने एच-1बी वीजा आवेदनों की कड़ी जांच किए जाने का स्वागत किया है लेकिन साथ ही आगाह किया है कि ऐसा अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं होना चाहिए क्योंकि अत्यधिक विशिष्ट कौशल की जरूरत वाली नौकरियों के लिए घरेलू श्रम बाजार में योग्य कर्मचारी हमेशा तत्काल उपलब्ध नहीं होते। एफआईआईडीएस का यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा कार्यक्रम की निगरानी कड़ी किए जाने के कुछ घंटे बाद आया। ट्रंप का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आउटसोर्सिंग कंपनियों समेत कुछ नियोक्ताओं ने इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।
कांड ने कहा, ‘‘इसका समाधान अमेरिकी कर्मचारियों और अत्यधिक कुशल प्रवासियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना नहीं है। समाधान एक पारदर्शी, लागू करने योग्य और योग्यता आधारित व्यवस्था है जिसमें धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नियम तोड़ने वालों के लिए ठोस दंड, वेतन और भर्ती संबंधी मजबूत सुरक्षा उपाय, घरेलू शिक्षा, प्रशिक्षण एवं नए कौशल के विकास में पर्याप्त निवेश तथा जरूरत साबित करने वाले नियोक्ताओं को वैश्विक प्रतिभाओं की भर्ती के लिए वैध एवं स्पष्ट व्यवस्था मुहैया कराना शामिल हो।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा के जरिये विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाने वाले नियोक्ताओं पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने यह जानकारी दी।
ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों द्वारा एच-1बी वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का लाभ पाने वालों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं।