By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 12, 2020
नयी दिल्ली। कांग्रेस ने राज्यों को 12 हजार करोड़ रुपये के ब्याजमुक्त कर्ज देने समेत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ करार देते हुए सोमवार को कहा कि अब सरकार को ठोस आर्थिक नीति बनाने, जीएसटी को तर्कसंगत करने और उपभोक्ताओं के हाथ में सीधे पैसे देने का कदम उठाना चाहिए ताकि देश ‘भयंकर मंदी’ से बाहर निकल सके। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों को नए निवेश के लिए पैसे देने चाहिए और उनसे कर्ज लेने के लिए कहने के बजाय खुद कर्ज लेना चाहिए।
उनके मुताबिक, वित्त मंत्री ने कहा कि खर्च बढ़ाने के लिए राज्यों को 12 हजार करोड़ रुपये दिये जायेंगे। जबकि राज्यों का कुल बजट लाखों करोड़ रुपये है। ऐसे में इस 12 हजार करोड़ रुपये को ऊंट के मुंह में जीरा कहा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘ठोस आर्थिक नीतियां बनाइए, मांग बढ़ाइए और जीएसटी तर्कसंगत बनाइए। जनता को मूर्ख बनाने का काम मत करिए। ताकि हम भयंकर मंदी और भयंकर बेरोजगारी से बाहर आ सकें।’’ कांग्रेस के डाटा विश्लेषण विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज विफल साबित हुआ है।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री ने सोमवार को कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये केंद्र सरकार राज्यों को 12,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध करायेगी। कर्ज 50 साल की अवधि का होगा और यह पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिये दिया जायेगा। उन्होंने इस साल केंद्रीय कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी)के एवज में नकद वाउचर देने की घोषणा की है। इन वाउचर का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे गैर-खाद्य सामान खरीदने के लिए किया जा सकता है जिनपर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता है। वित्त मंत्री के अनुसार, सरकार ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्यौहारों के मौके पर 10,000 रुपये का ब्याज मुक्त अग्रिम देने का फैसला भी किया है। उपभोक्ता खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने की योजना के तहत सरकार ने यह कदम उठाया है।