By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 17, 2021
नयी दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नई पूंजी डालने के लिए शून्य कूपन बांड जारी करने पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा चिंता जताए जाने के बाद वित्त मंत्रालय दूसरे वहनीय विकल्पों पर विचार कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब वित्त मंत्रालय बैंकों में पूंजी डालने के लिए बैंक निवेश कंपनी (बीआईसी) गठित करने सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। पी जे नायक समिति ने भारत में बैंकों के बोर्ड संचालन पर तैयार अपनी रिपोर्ट में बीआईसी को बैंकों की होल्डिंग कंपनी के रूप में स्थापित करने या मुख्य निवेश कंपनी बनाये जाने का सुझाव दिया था। रिपोर्ट में बैंकों में सरकार के शेयर बीआईसी में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया था, जो इन सभी बैंकों की मूल होल्डिंग कंपनी बन जाएगी। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक ‘लिमिटेड’बैंक बन जाएंगे।
इसका पहला परीक्षण पंजाब एंड सिंध बैंक पर किया गया है। इस व्यवस्था के तहत पिछले साल पंजाब एंड सिंध बैंक में छह विभिन्न परिपक्वताओं वाले शून्य-कूपन बांड जारी कर 5,500 करोड़ रुपये की पूंजी डाली गई है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए शून्य-कूपन बांड को लेकर चिंता जताई है।सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने इस माध्यम से किसी बैंक में पूंजी डालने के लिए दक्ष तरीके से गणना के मुद्दे को उठाया हैं। सूत्रों ने कहा कि ये बांड आमतौर पर गैर-ब्याज वाले होते हैं, लेकिन इसके अंकित मूल्य पर बड़ी छूट मिलती है। ऐसे में इसका शुद्ध मौजूदा मूल्य निकालना मुश्किल होता है।