By अभिनय आकाश | Sep 21, 2026
सऊदी अरब की राजधानी और सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र रियाद शनिवार को जंग का एक ऐसा मैदान बन गया जिसकी कल्पना सऊदी रक्षा रणनीतिकारों ने भी नहीं की थी। यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने एक बेहद योजनाबद्ध और घातक सैन्य रणनीति के तहत रियाद की सुरक्षा में तैनात दुनिया के सबसे महंगे और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से पंगू बना दिया। शनिवार को कुछ ही घंटों के भीतर रियाद के आसमान ने हवाई हमलों की तीन अलग-अलग लहरें देखी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो बात सबसे भयावह और हैरान कर देने वाली रही वो थी सऊदी अरब के अर्ली वार्निंग सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की पूरी तरह की नाकामी। तीसरी लहर के दौरान तो स्थिति यह थी कि किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित सऊदी अरामको के तेल स्टोरेज टैंकरों पर जब धमाके हुए तब ना तो कोई वार्निंग सायरन गूंजा और ना ही रक्षा प्रणाली की कोई इंटरसेप्टर मिसाइल आसमान में लॉन्च होती दिखी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षा की यह बड़ी चूक साफ दिखाई दे रही है। फुटेज में देखा जा सकता है कि कुछ अत्यंत तीव्र गति वाली मिसाइलें जिनके हाइपरसोनिक होने का अनुमान है। सऊदी अरब के पैट्रियट और थार एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दागी गई इंटरसेप्टर मिसाइलों को हवा में ही चकमा देते हुए आगे निकल गई। यह मिसाइलें इतनी सटीकता और जबरदस्त गति के साथ अपने टारगेट पर जाकर लगी कि पारंपरिक एंटी मिसाइल प्रणालियां उनके सामने पूरी तरह से बेअसर साबित हुई। अमेरिकी और पश्चिमी देशों की अरबों डॉलर की तकनीक से लैसी सुरक्षा दीवार ताश के पत्तों की तरह ढह गई। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक गति और दिशा बदलने की अपनी अनूठी क्षमता के कारण इन यमनी मिसाइलों ने सऊदी अरब के आसमान में मौजूद सुरक्षा कवच को कई स्तरों पर काट दिया। स्टॉक की कमी और पंगू होता सिस्टम। इस हमले ने सऊदी अरब की एक और बड़ी कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। वो है इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक की भारी कमी। पिछले कुछ महीनों में लगातार हुए ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के पेट्रिएट मिसाइल भंडारों को खाली होने की कगार पर पहुंचा दिया है। क्षेत्रीय अधिकारियों और खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि सऊदी अरब इस समय हवाई रक्षा के मामले में बेहद असुरक्षित स्थिति में है और उसने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र जैसे मित्र देशों से तत्काल एंटी मिसाइल और हवाई रक्षा सहायता की गुहार लगाई है। अब जब तक नया स्टॉक या विदेशी सहायता नहीं पहुंचती तब तक रियाद का आसमान पूरी तरह से लगभगलगभग खुला हुआ है। रियाद को सऊदी अरब का सबसे सुरक्षित किला माना जाता था क्योंकि यहां देश के सभी प्रमुख मिलिट्री, फाइनेंसियल और पॉलिटिकल संस्थान मौजूद हैं। सालों से सऊदी किंगडम ने इस शहर को चारों ओर से सुरक्षा की कई परतें इसके आसपास तैनात की थी।