By दिव्यांशी भदौरिया | Feb 13, 2026
इस साल के अंत तक अग्निपथ योजना की परीक्षा हो सकती हैं। वैसे कुछ हफ्ते पहले ही लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी के बोलने या न बोलने के मुद्दे को लेकर गतिरोध किया गया था। क्योंकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब में लिखी बातों का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए, तब यह विरोध और भी बढ़ गया। आपको बता दें कि, जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब से सामने आई बातों में अग्निपथ योजना का जिक्र है।
कितनों को मिलेगा रोजगार
इस साल के आखिरी में अग्निपथ योजना की भी होनी है, जब पहला बैच सेवा पूरी कर बाहर आएगा। आपको बता दें कि, सबसे पहले नेवी के अग्निवीर बाहर आएंगे। इसी साल नवंबर में नेवी के पहले बैच के करीब 2600 अग्निवीरों के चार वर्ष पूरे हो चुके हैं। अगले साल की शुरुआत में फिर से आर्मी और एयरफोर्स के अग्निवीरों का पहला बैच बाहर आएगा।
वर्तमान में चल रही स्कीम के मुताबिक, अग्निवीरों में से 25% परमानेंट होंगे और बाकी बाहर हो जाएंगे। अब यही से अग्निपथ योजना की असली अग्निपरीक्षा शुरु होगी। सबसे बड़ा सवाल है कि बाहर होने वाले 75% युवाओं को आगे कितना और किस तरह का रोजगार मिलेगा। सरकार ने दावा किया है कि इसके पूरे इंतजाम किए जाएंगे। CAPF सहित कई राज्य सरकारों ने पुलिस में अग्निवीरों के लिए कुछ कोटा निर्धारित किया है। जबसे अग्निपथ योजना लागू हुई है, तब से ये सवाल उठ रहा है कि केवल 25% अग्निवीरों को ही परमानेंट करना पर्याप्त नहीं हैं।
आपको बताते चलें कि तीनों सेनाओं की तरफ से सिफारिश की गई है कि कम से कम 40 से लेकर 50 और कुछ मामलों में तो 70% तक अग्निवीरों को परमानेंट किया जाना चाहिए। हालांकि, अब सवाल उठता है कि सरकार 25% से अधिक अग्निवीरों के स्थायी करने पर विचार नहीं कर रही है। सरकार की तरफ से इस तरह के संकेत दिए गए हैं कि अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार नहीं है। हालांकि रिटेंशन रेट, यानी कितने अग्निवीरों को स्थायी करना है, इसमें जरुरी बदलाव का अभी मौका है? अगर स्कीम में इस तरह का बड़ा बदलाव यदि पहले बैच में ही कर दिया जाएगा, तो ये सरकार की आगे की सरदर्दी को कम करेंगा।
बदलाव का अवसर
यदि पहले बैच में केवल 25% को ही परमानेंट किया जाता है और फिर आगे जाकर इसमें बदलाव होगा और दूसरे या उसके आगे के बैच से ज्यादा अग्निवीरों को परमानेंट किया जाता है तो ये फिर कोर्ट केस की ही बाढ़ आ जाएगी। आपको बताते चलें कि रक्षा मंत्रालय वैसे ही कई केस लड़ रहा है और बार-बार कहा जाता है कि अपने लोगों के खिलाफ और उन लोगों के खिलाफ रक्षा मंत्रालय लड़ रहा है जो देश सेवा कर रहे हैं, या कर चुके हैं।
अग्निवीर यदि ड्यूटी के दौरान शहीद होते हैं या विकलांग हो जाते हैं, तो उन्हें और उनके परिवार को नियमित सैनिकों के समान सहायता दिए जाने की सिफारिश सेना पहले ही कर चुकी है, लेकिन यह मुद्दा अभी विचाराधीन है। अग्निपथ योजना को लेकर राजनीतिक स्तर पर बहस जारी है, परंतु इसकी वास्तविक परीक्षा अब अधिक दूर नहीं है।