Prabhasakshi Special: जब पहली बार भारत के लोगों ने डाला वोट, 1951 के आम चुनाव से अब तक क्या-क्या बदला

By अभिनय आकाश | Mar 08, 2022

पांच राज्यों में चुनाव हो चुके हैं और सभी नतीजों के लिए 10 मार्च की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं। इस बीच तमाम एग्जिट पोल की तरफ से चुनाव को लेकर तमाम तरह के अनुमान भी जताए जा रहे हैं। लेकिन आज आपको हम इन चुनावों या उसके आने वाले नतीजों को लेकर कुछ भी नहीं बताने जा रहे हैं। बल्कि आज आपको चुनाव के इतिहास में लेकर जा रहे हैं। अगर मैं आपसे सवाल करूं कि भारत आजाद कब हुआ? आप फट से 15 अगस्त 1947 कहेंगे। अगर मैं आपसे कहूं कि भारत गणतंत्र कब बना? आप कहेंगे 26 जनवरी 1950, हम आपका कोई जीके का टेस्ट नहीं ले रहे हैं। लेकिन अगर मैं आपसे पूछूं कि भारत लोकतंत्र कब बना। जाहिर सी बात है लोकतंत्र अंग्रेजों से तो हमें मिला नहीं। दरअसल, 26 जनवरी की घोषणा तो हो गई थी लेकिन थ्योरी में और प्रैक्टिकल अभी बाकी थी। सारे सवालों के जवाब हमारे संविधान में छिपा था जो ये तय करता कि हमारा गणतंत्र और हमारा लोकतंत्र कैसा होगा। भारत को लोकतंत्र होना था और उसके लिए जरूरी था चुनाव करवाना। चुनाव लोकतंत्र की एक आवश्यक शर्त है। आज से करीब 71 साल पहले 25 अक्टूबर को भारत में लोकसभा का पहला चुनाव शुरू हुआ। जो लगभग पांच महीनों तक चला था। उस समय भारत के लोगों के लिए आजादी बिल्कुल नई चीजें थी। हमारे पास आजादी का अनुभव केवल चार वर्ष का था लेकिन गुलामी का अनुभव करीब 800 वर्षों का था। कल्पना कीजिए जो देश 800 सालों से गुलाम था वो अचानक आजाद हुआ और इससे पहले वो देश भी नहीं था। देश बना, गणतंत्र  बना और फिर वहां अचानक से चुनाव हुए। कहा गया कि ये लोकतंत्र बनेगा। लेकिन किसी ने भी लोकतंत्र को देखा नहीं था जाना नहीं था। 

वर्ष 1951 में आजाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। वो भारत जो केवल एक वर्ष पुराना गणतंत्र था, जहां पर 35 करोड़ की आबादी में 85 प्रतिशत लोग अशिक्षित थे। उस समय संचार का कोई माध्यम नहीं था। टीवी नहीं था, रेडियो बहुत कम थे। अखबार बहुत कम थे और कोई माध्यम संचार का ऐसा नहीं था जो लोगों तक पहुंचता हो। लोकतंत्र को लेकर लोगों में जागरूकता न के बराबर थी क्योंकि लोकतंत्र को उन्होंने इससे पहले कभी देखा नहीं था। वहां पर आम चुनाव कराना कितनी बड़ी चुनौती थी। 

वोटर्स को जागरूक करना बड़ी चुनौती

वोट कैसे डालना है और कहां डालना है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए चुनाव आयोग ने एक फिल्म बनाई। जो देशभर के तीन हजार से ज्यादा सिनेमाघरों में दिखाई गई। लोग मुफ्त में जाकर ये फिल्म देख सकते थे। इसके साथ ही ऑल इंडिया रेडियो पर भी बहुत सारे कार्यक्रम होते थे। जिसमें लोगों को चुनाव प्रक्रिया के बारे में चुनाव के बारे में बताया जाता था। अखबारों में भी लेख और विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को जागरूर किया गया। इस चुनाव में स्टील के कुल मिलाकर 25 लाख बैलेट बॉक्स इस्तेमाल किए गए थे। उस वक्त हर पार्टी का अलग बैलेट बॉक्स होता था। इस चुनाव में 180 टन पेपर का इस्तेमाल हुआ जिसपर उस जमाने में 10 लाख रूपये खर्च हुए थे। 

इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा 2017 के प्रदर्शन को दोहराएगी: दिनेश शर्मा

भारत में पहले आम चुनाव के बारे में कुछ प्रमुख बातें:

पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 27 मार्च 1952 के बीच हुआ था

 चुनाव के लिए करीब 1874 उम्मीदवारों और 53 पार्टियों ने चुनाव लड़ा था

पार्टियों ने 489 सीटों पर चुनाव लड़ा

कांग्रेस ने 364 सीटों के साथ चुनाव जीता क्योंकि लोगों ने उस पार्टी को वोट दिया जिसका नेतृत्व जवाहरलाल नेहरू ने किया था

भाकपा वह पार्टी है जो 16 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही क्योंकि उन्हें लगभग 3.29 प्रतिशत वोट मिले

एसओसी 10.59 फीसदी वोटों के साथ चुनाव में तीसरे स्थान पर रही और 12 सीटों पर जीत हासिल की

पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए कुल वोटों का लगभग 45 प्रतिशत मतदान हुआ था

भारत की जनसंख्या 36 करोड़ थी, जिसमें से 17.32 करोड़ जनसंख्या मतदान के योग्य थी

चुनाव में 45.7 प्रतिशत मतदान हुआ।

क्या रहा पहले आम चुनाव का परिणाम

देश के पहले आम चुनाव में आजादी की लड़ाई का दूसरा नाम बनी कांग्रेस ने 364 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत प्राप्त किया। देश के पहले आम चुनाव के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने। उनके अलावा 2 ऐसे नेता भी चुनाव जीते जो आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री बने, ये थे- गुलजारी लाल नंदा और लाल बहादुर शास्त्री। 

प्रमुख खबरें

BRICS Summit 2026 LIVE Updates: 18वें ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने नई दिल्ली के लिए रवाना हुए Xi Jinping

Pakistan में बाल हिंसा के 1914 मामले दर्ज, PPP नेता Sherry Rehman ने जताई चिंता

रात में Stress घटाकर सुकून की नींद दिलाएंगे ये 3 आसान Yoga आसन

BRICS Summit 2026 | दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सख्त, भारत मंडपम और सेंट्रल दिल्ली के लिए एडवाइजरी जारी