कोरोना तो केवल लेता है जान, चरित्र वाला वायरस आत्मा को पहुंचाता नुकसान, पहले देवी-देवता और अब...आपकी वजह से ही ऐसे लोग माता-पिता तक पर पहुंच गए

By अभिनय आकाश | Feb 12, 2025

लगा अगर गेहूं में कीड़ा बाहर से मंगवाओगे,

हम सभी का बचपन ऐसी कहानियों को पढ़कर, सुनकर बीता है जब छत्रपति शिवाजी महाराज का एक सेनानायक दुश्मन की एक महिला को लूट लाया और कहा कि आपके लिए मैं इस खूबसूरत लड़की को लेकर आया हूँ। तो शिवाजी ने उस सेनानायक को डांटा और उस लड़की से कहा कि मैं अपने सेनापति की ओर से क्षमा चाहता हूं। आप बड़ी खूबसूरत हैं, मेरी माँ भी आप जैसी सुंदर होतीं तो मैं भी आप जैसा सुंदर होता। ऐसा कहने वाला शिवाजी हमें पढ़ाया गया। आपसे एक सवाल करूं कि भगवान से कौन बड़ा है? भगवान से मां बड़ी है, जिसने भगवान पैदा किया है। इसलिए तुलसीदास जी भी शुरुआत में ही प्रणाम करते हुए कहते हैं बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। प्राची दिशा के समान कौशल्या हैं उन्हें प्रणाम करता हूं जिनकी कोख से सूर्यवंशी राम पैदा हुए। प्रभुराम को जब 14 सालों का वनवास हुआ तो जब वो अपनी मां के पास गए तो कौशल्या ने पूछा क्या हुआ तो उन्होंने ये नहीं कहा कि मां मुझे जंगल भेज दिया गया। भरत को राजा बना दिया। सिंहासन छीन लिया गया। राम ने कहा कि पिता देहि मोहि कानन राजू यानी पिता ने मुझे जंगल का राज दे दिया। मैं जंगल का राजा बन गया। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू यानी जहां मेरे सारे बड़े काम प्रतीक्षा कर रहे हैं। मतलब अपने 14 बरस के वनवास को भी इतनी सहजता से प्रस्तुत करने वाले राम ही हो सकते हैं। ये बनाते है मकसद है कि हमारी जड़े कहां से जुड़ी हैं। भारत एक पारिवारिक औऱ संस्कारों का देश है। इस समय भारत में सबसे पवित्र महाकुंभ का समय चल रहा है। देश के करोड़ों परिवार अपने माता पिता और बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे हैं। भारत श्रवण कुमार का देश है और यहां माता पिता को पूजनीय माना जाता है। लेकिन जिस समय देश के करोड़ों परिवार महाकुंभ की आस्था में डूबे हुए हैं। देश के कुछ यूट्यूबर माता पिता को लेकर बहुत ही अभ्रद्र और अश्लील टिप्पणी करता है। इसने बड़ी आसानी से वो शब्द कह दिए लेकिन हम उन शब्दों को आपके सामने कह नहीं सकते। हम आपके परिवार की आस्था और संस्कारों को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते। हम इस शो के दौरान न तो इन यूट्यूबर का नाम लेंगे और क्योंकि हम इसे वायरल नहीं करना चाहते। हम इसे वो नहीं देना चाहते जो ये चाहता है। हम इसके व्यूज नहीं बढ़ाना चाहते जो ऐसे लोग चाहते हैं। न ही हमें इसे कोई विलेन बनाने की मंशा है। बस हम ये बताना चाहते हैं कि ऐसे लोग भारत के संस्कारों का अपामन करने हैं। फिर कानूनी एक्शन होने पर माफी मांगते हैं, थोड़ा आसूं बहा लेते हैं। कुछ महीने या दिन की जेल काट अपने मेन गोल को प्राप्त कर जाते हैं। 

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सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर्स की एक नई पौड़ 

आजकल आपने एक शब्द सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर्स खूब सुना होगा। या फिर यूट्यूबर्स या रील्स बनाने वाले। पिछले कुछ वर्षों में यूट्यूबर्स की एक नई पौड़ आ गई है। जो पॉडकास्ट बनाती है। वीडियो बनाती है और उनके जबरदस्त व्यूज भी आते हैं। ये नए जमाने का मीडिया है जिसमें बड़े बड़े नेता, बड़े बड़े खिलाड़ी, सिलेब्रेटी यहां जाते हैं और इंटरव्यूज देते हैं। बहुत सारे तो कहते हैं कि इतनी लोकप्रियता मीडिया से भी बढ़ रही है। ये लोग जनता की पसंद पर अपना कंटेंट नहीं बनाते बल्कि एल्गोरिदम के हिसाब से तय करते हैं। वो गणित ये कहता है कि जितनी ज्यादा अश्लील बातें आप करेंगे। जितने ज्यादा अश्लील वीडियो आप बनाएंगे। जितने ज्यादा नए नए विवाद आप पैदा करेंगे। उतने ज्यादा व्यूज आपको मिलेंगे। उतने ज्यादा आप वायरल होंगे। एक अंधी दौड़ शुरू हो चुकी है। जिसमें हर यूट्यूबर ज्यादा से ज्यादा व्यूज चाहता है। पैसा कमाना चाहता है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात है कि देश का एक बड़ा वर्ग उन्हें न केवल देख रहा है बल्कि उस पर तालियां बजा रहा है। आज भारत जैसे संस्कारी देश में तमाम इंफ्लूएंशर्स के बीच व्यूज पाने की रेस चल रही है। लोग जानते हैं कि इनके पास कोई खास टैलेंट नहीं है। इसलिए ये सबसे आसान रास्ता आपत्तिजनक, भद्र और अश्लील कंटेंट बनाकर पैसे कमाने का रास्ता चुनते हैं। जिन यूट्यूबर्स ने गंदी बातें कीं, अपनी मां के बारे में घटिया और अश्लील बात की, वो माफी के लायक तो नहीं हैं क्योंकि गलती अनजाने में नहीं हुई। जो कुछ कहा गया वो सोच समझकर, लिखी गई स्किप्ट के आधार पर कहा गया। ये कोई स्लिप ऑफ टंग नहीं था। ये एक इंग्लिश शो की कॉपी थी। इस घटना से इन यूट्यूबर्स का असली चेहरा सामने आ गया। बहुत सारे यूट्यूबर्स ऐसे हैं जिनके न कोई मोर्लस हैं, न वैल्यू हैं। वो सिर्फ अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाकर पैसा कमाना चाहते हैं। उनकी बातों का समाज पर क्या असर होता है, इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं।

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गालियां और अश्लीलता में ढूंढ़ते डार्क ह्यूमर

डार्क कॉमेडी के नाम पर माता पिता के बारे में गंदी-निम्न स्तर की बातें करना। उनके प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बात करना। पैसा कमा लिया तो किसी को पैसे का लालच देकर कहना कि 2 करोड़ दूंगा आकर मेरा...बात की शुरुआत से बात के अंत तक अनगिनत बार मां-बहन की गालियां देना। ये कॉमेडी तो कतई नहीं हो सकती और नो फिल्टर कहे तो ये नीचता की पराकाष्ठा है। या सीधे सीधे कहे कि खराब परवरिश का नतीजा है। वरना इस देश में क्रिकेट और कोविड को छोड़कर विरले कोई ऐसा मुद्दा हो जिसमें हर वर्ग, हर उम्र, हर धर्म का आदमी एक सुर में सुर मिलाए। उस देश में सभी काला कपड़ा लगाकर, काले कमरे में गाली दे देकर डार्क ह्यूमर का जिक्र कर रहे हैं और बेशर्मों की तरह ठहाके लगा रहे हैं उन सभी को कह रहा है बहुत हो गया, अब नहीं। महाराष्ट्र का पक्ष विपक्ष हो, दिल्ली में बैठे नेता, किसान नेता, महिला आयोग या सोशल मीडिया पर लोग या आपके और हमारे जैसे आम आज हर कोई कह रहा है कि इन पर कार्रवाई हो। आप गौर से नजर डालेंगे तो पाएंगे पिछले कुछ वक्त से ऐसा चलन सा चल गया है। आपको याद होगा कुछ साल पहले एक 'कॉमेडियन' हिंदू देवी-देवताओं के विवादास्पद चित्रण और उनका मज़ाक उड़ाने के साथ-साथ गोधरा ट्रेन अग्निकांड के पीड़ितों के बारे में अपनी मज़ाकिया टिप्पणियों की वजह से काफी चर्चा में रहा था। इतना की विवादित लोगों को स्वैग के साथ गले लगाने वाला टीवी शो उन्हें न केवल बुलाता है। बल्कि वो तो विनर बनकर ही बाहर निकलता हैं। इससे पहले भी वो ओटीटी एप पर आने वाले एक शो को जीत चुका होता है। मतलब सीधा सा फंडा है कुछ भी गंद बोलो, धर्म के रूप टिप्पणी करो, बस केवल सिर तन से जुदा वाले को छोड़कर तो एक खास वर्ग आपको कूल समझने लगेगा। आप प्रसिद्धि पाने लगोगे। 

कोरोना शरीर को मारता, चरित्र का वायर आत्मा मार देता

चरित्र का वायरस जो नुकसान करेगा वो कोरोना भी नहीं कर सकता। क्योंकि कोरोना तो शरीर को ही मारता था, ये तो आत्मा को मार देता है। ये देश सरकारों, नेताओं, पार्टियों से नहीं बना। ये देश मेरे और आपके जैसे लोगों ने बनाया है। एकात्म पराक्रम यानी हमने अकेले में पराक्रम किया, मसलन कोई मराठी के प्रोफेसर का लड़का बल्लेबाज बन गया, कोई ओमान के पेट्रोलपंप पर पेट्रोल भरने वाला आया और धीरूभाई अंबानी बन गया। कोई वडनगर के रेलवे स्टेशन पर अपने बाप की चाय की कप पकड़ाने वाला लड़का देश का प्रधानमंत्री बन गया। ये सब सरकारों की योजनाओं के काम नहीं थे। अकेले एक आदमी ने मेहनत की। एक के बाद एक होते इस तरह की घटनाओं के बाद सवाल हमारे और आपके लिए भी है कि इस तरह के लोगों को इंफ्लूएंशर्स कहते हैं उन्हें समझना होगा कि फॉलोइंग, ऐसे लोगों का इंफ्लूएंश अस्थायी होता है।  विश्वसनीयता के लिए, लोगों के दिलों में लंबे समय तक जगह बनाने के लिए नैतिक बल और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।

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