By अभिनय आकाश | Jan 10, 2026
अमेरिका और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव इस कदर बढ़ गया कि डेनमार्क ने अपनी सेना को सीधा और खौफनाक आदेश दे दिया। अगर कोई घुसपैठ हुई तो कमांडर्स के आदेश का इंतजार मत करना। सीधे गोली चला देना। जी हां, डेनमार्क ने अमेरिका को साफ चेतावनी दे दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोई भी कोशिश नेटो के खात्मे की शुरुआत होगी। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने अपने रुख को शीशे की तरह साफ कर दिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक डेनमार्क ने अपने उस 1952 के आदेश को फिर से जिंदा कर दिया है जो नाजी जर्मनी के हमले के वक्त बनाया गया था। यह आदेश कहता है कि अगर कोई विदेशी ताकत डेनिश इलाके को धमकी देती है तो सैनिकों को ऊपर से आदेश मिलने का इंतजार नहीं करना है बल्कि तुरंत जंग शुरू करनी है।
डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड अब यह तय करेगी कि ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की किस हलचल को हमला माना जाएगा और कब ट्रिगर दबाना है। अब एक सवाल कि आखिर यह विवाद शुरू कहां से हुआ। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें लंबे समय से ग्रीनलैंड की रणनीतिक खनिज और उसकी लोकेशन पर टिकी है। ट्रंप ने बार-बार धमकी दी है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस द्वीप पर जबरदस्ती कब्जा कर लेंगे। ट्रंप का तर्क है कि वहां रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी अमेरिका की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। कल ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वांस ने भी आग में घी डालते हुए कहा कि डेनमार्क आर्कटिक इलाके की सुरक्षा करने में फेल रहा है और दुनिया की रक्षा के लिए अमेरिका को वहां मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए कब्जा करना जरूरी है। डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने अमेरिका को सख्त लहजे में कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपने ही नेटो सहयोगी देश पर सैन्य हमला करता है तो सब कुछ रुक जाएगा। यानी नेटो जैसा संगठन पल भर में इतिहास बन जाएगा। डेनमार्क का यह बयान बताता है कि यूरोप अब अमेरिका की दादागिरी के आगे घुटने नहीं टेकने वाला। अब एक सवाल कि क्या ट्रंप ग्रीनलैंड के लिए वाकई एक युद्ध छेड़ेगी? और क्या डेनमार्क की छोटी सी सेना दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को रोकने का दम रखती है? यह सवाल अब पूरी दुनिया को डरा रहा है। एक बात तय है अगर अटलांटिक की बर्फ पर पहली गोली चली तो उसका शोर वाशिंगटन ही नहीं पूरी दुनिया की शांति को तबाह कर देगा।