By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 02, 2026
फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में कॉकपिट के भीतर पायलट पर कथित हमले के बाद विमानन सुरक्षा उपायों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। इस घटना में सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन पर चाकू से हमला किया था। विमान में 174 लोग सवार थे और बाद में इसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया।
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ फिलिप बाउम ने कहा कि दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिष्ठा के प्रति बेहद सजग है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में पायलटों की जांच और उड़ान से पहले सुरक्षा प्रक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनके देश के विदेशी एयरलाइंस के साथ ऐसे समझौते हैं, जिनके तहत इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के नागरिक पायलटों को देश में उड़ान भरने से रोका जाता है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘‘एक खामी’’ थी और उसे दूर किया जा रहा है। इजराइली अधिकारियों ने फ्लाईदुबई के सह-पायलट को ओमानी नागरिक बताया है। इजराइल और ओमान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ मेनाखेम बाखराख ने कहा कि घटना सुरक्षा प्रक्रियाओं में खामी के बजाय उनके अनुपालन में कमी का नतीजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या तय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या सह-पायलट के व्यवहार को लेकर पहले कोई चिंता जताई गई थी और आपात संदेश मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने कैसी प्रतिक्रिया दी।
9/11 के हमलों के बाद कॉकपिट के दरवाजों को मजबूत और लॉक करने की व्यवस्था की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने कॉकपिट के भीतर से उत्पन्न होने वाले खतरे की चुनौती को फिर सामने ला दिया है। विमानन सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू बोरी ने कहा कि एयरलाइन कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की जानकारी होती है और अगर कोई अंदरूनी व्यक्ति गलत मंशा रखता है तो वह इन कमजोरियों का फायदा उठाने की बेहतर स्थिति में हो सकता है।