स्वर्ग के लिए (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Mar 21, 2026

उस अनदेखे स्वर्ग में जाने को सब लालायित हैं और जो स्वर्ग जैसी दुनिया सामने है उसे नरक बना देने की ज़िद है। बिना खुद मरे तो वहां जा नहीं सकते लेकिन कभी अपने खुद से मिलने के बाद घमंड और आत्मप्रशंसा छोड़कर ऐसे लोगों द्वारा भी स्वर्ग ही जाने की इच्छा जताई जाती है जिनके कारनामों ने पृथ्वी रुपी स्वर्ग को भी नरक बनाने में पूरा सहयोग दिया। उनके किए धरे के साथ तो नरक का वातावरण ही मेल खाता है। उनका आत्म विशवास समझाता है कि कुछ देर बात न कर, चिंतन कर, शांत रहकर ही स्वर्ग मिल सकता है। कितना आसान रास्ता है। बढ़ती उम्र के लोग तो ऐसा सोच ही सकते हैं। अनेक लोग ज़िंदगी के बाद भी संभावनाएं मानते हैं और उनके बारे अधिकार से बात करते हैं। पूजा स्थल बनवाते और मूर्तियां लगवाते हैं। पूजा पाठ, उपदेश, कथाएं और भंडारे करवाते हैं। इस माध्यम से वे दुनियावी यश अर्जित करते हैं।   

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इस रास्ते के अड़ोस पड़ोस में स्थित जंगल भी उनका निजी ही होता है। वहां की हरियाली पर उनका अधिकार होता है। वहां वे सदनाम के कई प्रयोग करते हैं। युद्ध करवाने के लिए शांति में डूबी योजनाएं रचवाते हैं। चरित्रहीन, भ्रष्टाचारी, असामाजिक, धोखेबाज़ सभी को माफ़ कर अपने साथ रख्रते हैं क्यूंकि वे भी स्वर्ग ही जाना चाहते हैं। उन सबको नरक शब्द से नफरत होती है हालांकि उन्होंने धरती नामक स्वर्ग में नरक ही जिया होता है। स्वर्ग को अपना भविष्य मानते हुए शायद वे पाप कहे जाने वाले अपने कृत्यों पर पछताते हैं।

  

सार्वजनिक स्तर पर उनके पछताने की ज़रूरत नहीं होती क्यूंकि उनकी तो ईश्वर से सीधे डील करने की तमन्ना होती है। उन्हें पता होता है कि ईश्वर के साथ न तो झगड़ा कर सकते हैं न उन्हें धमका सकते हैं और न ही उन पर हमला करवा सकते हैं। वे सबसे मानवीय और सुरक्षित यही तरीका अपनाते हैं कि खुद को धामिक बताएं, पूजास्थल बनवाएं। पूजास्थल जाकर, पूजा पाठ करवाकर, दान देकर भगवान् से कभी माफी नहीं मांगते बलिक आशीर्वाद लेकर आते हैं। सोशल मीडिया और अखबारों में छपवाते हैं कि पूजास्थल जाकर आशीर्वाद लिया। उनके परिवार वाले भी उन्हें पूरा सहयोग करते हैं। यह उनका नैतिक कर्तव्य होता है।    

किसी दूसरे को लगे न लगे, अपने आप यह महसूस कर लें कि जीवन जीते समय, स्वर्गिक अनुभव और भविष्य में स्वर्ग प्राप्त करने के लिए अच्छा काम किया जा रहा है। कोई माने न माने, स्वर्ग के लिए कुछ करना अच्छा काम ही है।  

- संतोष उत्सुक

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