By अंकित सिंह | Jun 02, 2026
नेपाल के साथ सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भागीदारी को भारत ने मंगलवार को खारिज कर दिया, जबकि कुछ ही दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि नेपाली प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन और यूनाइटेड किंगडम की भागीदारी मांगी थी। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की ‘भारत अतिक्रमण’ वाली टिप्पणी के संबंध में मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश मंत्री के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों का समाधान केवल दोनों देशों के बीच ही होना चाहिए और ऐसे मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
जायसवाल की ये टिप्पणी रैपर से राजनेता बने शाह के रविवार के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लिपुलेख दर्रे के सीमा विवाद पर भारत के साथ चर्चा के अलावा नेपाल चीन और ब्रिटेन के भी संपर्क में है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह समस्या उस समय से चली आ रही है जब ब्रिटिश भारत ने इस क्षेत्र को छोड़ा था, इसलिए हमारा मानना है कि इस मामले में इंग्लैंड को भी शामिल किया जाना चाहिए।
शाह ने संसद के मौजूदा सत्र में अपनी पहली उपस्थिति के दौरान कहा कि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मुझे यह तथ्य प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला। केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्र पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। भारत लगातार यह दावा करता रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं।
देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।