By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 30, 2026
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने बुधवार को सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक हितों वाला कोई बड़ा नेटवर्क राज्य को अस्थिर करने और उनकी सरकार को कमजोर करने के लिए काम कर रहा था। सिंह का यह बयान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के 2024 में उनके काफिले पर हुए सशस्त्र हमले के सिलसिले में दो और लोगों को गिरफ्तार किए जाने की घोषणा करने के एक दिन बाद आया। सिंह ने मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बीच पिछले साल फरवरी में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इनमें आइजोल में यूकेएनए प्रमुख की गिरफ्तारी भी शामिल है, जो इस हमले का आरोपी है।” जून 2024 में मणिपुर के कांगपोकपी जिले में के सिनाम गांव के पास एनएच-37 पर कुछ अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में दो सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा था। सिंह ने कहा, “यह बात बहुत चिंताजनक है कि इस मामले के आरोपी और ट्रोंगलाओबी हमले सहित अन्य बर्बर हमलों में शामिल लोग यूकेएनए से जुड़े हुए हैं, जो एसओओ (सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स) समझौते का हिस्सा नहीं है।” सात अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में संदिग्ध उग्रवादियों की ओर से किए गए आईईडी हमले में दो बच्चों की मौत हो गई और उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई।
एनआईए ने मंगलवार को बताया कि उसने हमले में शामिल होने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इससे पहले, एक आरोपी को अगस्त में पकड़ा गया था। सिंह ने कहा, “इससे एक गंभीर सवाल उठता है।
क्या वे सिर्फ अपने फायदे के लिए काम कर रहे थे या फिर कोई बड़ा नेटवर्क था, जिसके राजनीतिक हित मणिपुर को अस्थिर करने और उस समय की चुनी हुई सरकार को कमजोर करने में निहित थे?” उन्होंने कहा कि हाल की गिरफ्तारियों से अहम कड़ियां सामने आई हैं और मामले की गहन जांच की जानी चाहिए। सिंह ने कहा, “मणिपुर के लोगों को यह जानने का हक है कि तीन मई 2023 को शुरू हुई जातीय हिंसा और अस्थिरता के पीछे क्या कोई बड़ा नेटवर्क है। हर कड़ी की जांच होनी चाहिए।
हर साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए। हर जिम्मेदार व्यक्ति को कानून का सामना करना चाहिए।” मणिपुर में मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती और पहाड़ी इलाकों में बसे कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत हुई है, जबकि 49 अन्य लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।