By अंकित सिंह | May 19, 2026
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने देहरादून में अंतिम सांस ली, जिससे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। अनुशासित नेतृत्व शैली और बेदाग सार्वजनिक छवि के लिए जाने जाने वाले खंडूरी उत्तराखंड के सबसे सम्मानित राजनीतिक व्यक्तियों में से एक रहे। विभिन्न दलों के नेताओं ने अनुभवी राजनेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शासन और जनसेवा में उनके योगदान को याद किया।
उन्होंने एक दृढ़ निश्चयी और प्रशासनिक मामलों में सख्त रवैया अपनाने वाले नेता के रूप में ख्याति अर्जित की। उनकी शासन शैली को अक्सर अनुशासन और ईमानदारी से जोड़ा जाता था, इन्हीं गुणों ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई। हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन के बाद, खंडूरी ने परिणाम की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 2011 में, भाजपा ने एक बार फिर खंडूरी को राज्य का नेतृत्व सौंपा। उन्होंने सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक मुख्यमंत्री के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया।
इस दौरान, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना जारी रखा और सरकारी कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने पर जोर दिया। उनकी नेतृत्व शैली राज्य के कई लोगों को पसंद आई। इस दौरान खंडूरी है जरूरी का नारा खूब लोकप्रिय हुआ और यह विकास और स्वच्छ शासन के प्रति समर्पित एक सख्त और ईमानदार प्रशासक के रूप में उनकी सार्वजनिक छवि को दर्शाता था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि उत्तराखंड के विकास और सुशासन में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
धामी ने उन्हें एक अनुशासित, मेहनती और दूरदर्शी नेता बताया, जिनकी कमी पूरे राज्य में महसूस की जाएगी। राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने भी शोक व्यक्त किया और उनकी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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