By अनन्या मिश्रा | Nov 04, 2026
वैदिक पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन से फिर चातुर्मास की समाप्ति होती है। चातुर्मास खत्म होने के बाद शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। जिसके बाद हर तरफ शहनाइयों की गूंज और शादियों की रौनक लग जाती है। वहीं देवउठनी एकादशी पर जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु भी योगनिद्रा से जागते हैं। इसलिए सभी एकादशी तिथियों में देवउठनी एकादशी को बेहद अहम माना जाता है।
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21 नवंबर 2026 को रेवती नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। जोकि विवाह कार्य के लिए बेहद उत्तम माना जाता है।
वहीं 24 नवंबर 2026 को रोहिणी नक्षत्र में विवाह के विशेष शुभ योग बन रहा है।
25 नवंबर 2026 को रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। जोकि दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
26 नवंबर 2026 को मृगशिरा नक्षत्र के प्रभाव से शादी के लिए बेहद शुभ मुहूर्त है।
हिंदू परंपराओं के मुताबिक शुभ मुहूर्त और नक्षत्रों में विवाह संपन्न करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, प्रेम और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि विवाह की आखिरी तिथि निश्चित करने से पहले स्थानीय पंचांग और ज्योतिषाचार्य से वर-वधू की कुंडली मिलाकर सटीक समय की पुष्टि जरूर करवा लें।
आपको बता दें कि विवाह के लिए शुभ मुहूर्त को देखना इसलिए भी जरूरी होता है कि जिससे कि वर-वधू के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।