Paris में फ्रांस के पहले पारंपरिक BAPS मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न, श्रद्धालुओं के लिए खुला द्वार

By प्रेस विज्ञप्ति | Sep 06, 2026

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आज देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। इसके साथ ही यह मंदिर अब सभी दर्शनार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है। इस अवसर पर यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से पधारे संतों-भक्तों के साथ ही विश्व के अनेक गणमान्य अतिथियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

आपको बता दें कि 13 दिनों तक चलने वाले इस मंदिर महोत्सव में सम्मिलित होने के लिए भारत, अमेरिका, कनाडा, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, और इंग्लैंड समेत 40 से भी अधिक देशों से लोग पधारे हैं।

मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा विधि और मंदिर का लोकार्पण

प्रातः काल वरिष्ठ संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महापूजा विधि का प्रारंभ किया, जिसमें श्री अक्षरपुरुषोत्तम महाराज, श्री घनश्याम महाराज, श्री राधा-कृष्ण भगवान, श्री सीता-राम भगवान संग श्री लक्षमण जी एवं श्री हनुमान जी महाराज, श्री पार्वती-शंकर भगवान संग श्री कार्तिकेय जी एवं श्री गणेश जी महाराज, श्री पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, श्री अय्यप्पा स्वामी जी, श्री नीलकंठवर्णी महाराज (भगवान स्वामिनारायण का स्वररूप) और गुरु परंपरा की मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम-सद्भाव बना रहे, वैश्विक शांति और सभी का कल्याण हो इस हेतु मंदिर में प्रथम प्रार्थना की।

ऐतिहासिक नगर यात्रा

प्रतिष्ठा विधि के पूर्व पेरिस शहर में एक भव्य नगर यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें संगीत, कला और भक्तिमय प्रस्तुतियों की छटा बिखरी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे नृत्य कलाकारों के साथ 14 सुंदर ढंग से सुसज्जित रथों ने भारत की कलात्मक और आध्यात्मिक परंपराओं को साकार किया। सुंदर ढंग से श्रृंगारित मूर्तियों – हिंदू देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूपों – को विश्व मानकों और विशेष मार्गों से होकर ले जाया गया। विश्वविख्यात एफिल टावर व एकोल मिलिटेर होते हुए यह नगर यात्रा प्लास द ला कॉनकॉर्ड पहुंचकर पूर्ण हुई। इस आध्यात्मिक नगरयात्रा से फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रेम और सौहार्द्र भावना का एक नए अध्याय का आरम्भ हुआ।


मंदिर की निर्माण यात्रा

पेरिस में एक भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प गुरु योगीजी महाराज ने वर्ष 1970 में किया था। इसके पश्चात विश्ववंदनीय प्रमुखस्वामी महाराज ने अपनी आध्यात्मिक विदेश यात्रा के दौरान यहां अनेकों बार पुष्पवर्षा कर अपने गुरु के संकल्प को एक आकर प्रदान किया और फ्रांस में सत्संग की नींव रखी। वर्ष 2021 में वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में मंदिर का भूमि पूजन हुआ और 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न हुई। वर्ष 2026 में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

मंदिर की विशेषता

●    यह मंदिर 5000 वर्गमीटर के क्षेत्र में फैला है।
●    इसके ऊपरी तल में पारंपरिक मंदिर और आधार में सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक सुन्दर हवेली का निर्माण किया गया है। 
●    इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम जैसे देशों से प्राप्त संगमरमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है।
●    इसमें 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियां हैं। 
●    मंदिर परिसर में सभागृह, कक्षाएं, खेलकक्ष, प्रदर्शनी स्थल एवं कार्यालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।


भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक और विश्वकल्याण का संदेश
फ्रांस की धरती पर स्थापित यह प्रथम पारंपरिक हिंदू मंदिर विश्व भर के लोगों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का माध्यम बनेगा। साथ ही यह उपासना, प्रेम, सद्भाव और एकता का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर संपूर्ण विश्व के कल्याण के संदेश के साथ सभी को प्रेरित करता रहेगा।

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