आसाराम जैसे झांसारामों को असाधारण सजा मिलनी चाहिए

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Feb 02, 2023

आसाराम पिछले दस साल से पहले ही जेल में बंद है। अब उसे उम्र कैद की सजा हो गई है। 81 वर्ष का आसाराम पता नहीं अभी कितने साल और जिंदा रहेगा? जितना व्यभिचार और बलात्कार उसने किया है, उस हिसाब से उसे काफी लंबी उम्र मिल गई है। साधु-संत और मौलवी-पादरियों का पाखंड रचाकर जो धूर्त लोग भक्तों को बेवकूफ बनाते हैं, वे इतने ऊँचे कलाकार होते हैं कि उन्हें जेल में भी सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं। शायद उनकी दैनंदिन दिनचर्या जेल में कहीं बेहतर होती है, क्योंकि वहां मजबूरन ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है, भोजन वगैरह काफी संतुलित होता है और डाक्टरी परीक्षा भी नियमित होती रहती है। पाखंड फैलाने से बाहर जो दिमागी तनाव पैदा होता है, जेल के अंदर उससे भी मुक्ति मिली रहती है।


इस आसाराम जैसे जितने भी देश में निराशाराम या झांसाराम हैं, वे सब असाधारण अपराधी हैं लेकिन हमारी न्याय व्यवस्था इतनी अजीब है कि इन सामूहिक अपराध करने वाले धूर्तों को भी वही सजा मिलती है, जो साधारण अपराधियों को मिलती हैं। यदि आसाराम दस साल और जिंदा रह गया तो आप जरा हिसाब लगाइए कि गरीब करदाताओं का कितना पैसा वह हजम कर जाएगा। आसाराम ही नहीं, उसकी तरह दर्जनों धूर्त साधु-संत इस समय जेल में बंद हैं। यदि ये साधु-संत अपने आप को महान आध्यात्मिक, पारलौकिक शक्ति संपन्न और जादू-टोना दिखाने वाले जादूगर मानते हैं तो ये अपनी रिहाई खुद ही क्यों नहीं कर लेते? यदि ये सचमुच असाधारण हैं तो इनकी सजा भी असाधारण क्यों नहीं होती? इन्हें किसी चांदनी चौक के चौराहे पर फांसी क्यों नहीं दी जाती? इनकी लाश को कुत्तों से घसिटवाकर सूअरों के झुंड के आगे क्यों नहीं फिंकवा दिया जाता ताकि सारा देश उस दृश्य को देखे और सारे पाखंडी गुरु-घंटालों की हड्डियां कांप उठें।

इसे भी पढ़ें: Asaram Bapu Convicted: आसाराम को उम्रकैद की सजा, रेप केस में अदालत ने सुनाया फैसला

ऐसा नहीं है कि ये पाखंडी सिर्फ हिंदुओं के बीच ही होते हैं। यूरोप के ईसाई इतिहास का एक लंबा समय ‘अंधकार युग’ माना जाता है, क्योंकि पोप तक को इन काले धंधों में अपना मुंह काला करते पाया गया है। कोई मजहब इस तरह के धूर्त्तों से मुक्त नहीं है, क्योंकि सारे धर्म, संप्रदाय और मजहब अंधविश्वास पर आधारित हैं। दुनिया को ठगने का यह सर्वोत्तम उपाय है। जो साधु-संत-संन्यासी, मुनि, पादरी, मौलवी आदि पवित्र और सत्यनिष्ठ हैं, उनके दुख का अनुमान मैं लगा सकता हूं लेकिन उनसे मेरी शिकायत यह भी है कि ऐसे मामलों पर वे चुप्पी क्यों साधे रहते हैं? वे इन पाखंडियों के खिलाफ अपना मुंह क्यों नहीं खोलते? क्या वे अपने आप से डरे हुए हैं?


-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

All the updates here:

प्रमुख खबरें

National Kabaddi: क्वार्टरफाइनल की तस्वीर साफ, Vadodara में अब खिताब के लिए मचेगा असली घमासान

Lionel Messi का छलका दर्द, बोले- English न आने से आधा अनजान महसूस करता था

Real Madrid का Champions League में दमदार पलटवार, पिछड़ने के बाद Benfica को 2-1 से रौंदा

Chabahar Port के Budget पर भारत की चुप्पी से Iran नाराज, कहा - यह है India का Golden Gate