आसाराम जैसे झांसारामों को असाधारण सजा मिलनी चाहिए

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Feb 02, 2023

आसाराम पिछले दस साल से पहले ही जेल में बंद है। अब उसे उम्र कैद की सजा हो गई है। 81 वर्ष का आसाराम पता नहीं अभी कितने साल और जिंदा रहेगा? जितना व्यभिचार और बलात्कार उसने किया है, उस हिसाब से उसे काफी लंबी उम्र मिल गई है। साधु-संत और मौलवी-पादरियों का पाखंड रचाकर जो धूर्त लोग भक्तों को बेवकूफ बनाते हैं, वे इतने ऊँचे कलाकार होते हैं कि उन्हें जेल में भी सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं। शायद उनकी दैनंदिन दिनचर्या जेल में कहीं बेहतर होती है, क्योंकि वहां मजबूरन ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है, भोजन वगैरह काफी संतुलित होता है और डाक्टरी परीक्षा भी नियमित होती रहती है। पाखंड फैलाने से बाहर जो दिमागी तनाव पैदा होता है, जेल के अंदर उससे भी मुक्ति मिली रहती है।

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ऐसा नहीं है कि ये पाखंडी सिर्फ हिंदुओं के बीच ही होते हैं। यूरोप के ईसाई इतिहास का एक लंबा समय ‘अंधकार युग’ माना जाता है, क्योंकि पोप तक को इन काले धंधों में अपना मुंह काला करते पाया गया है। कोई मजहब इस तरह के धूर्त्तों से मुक्त नहीं है, क्योंकि सारे धर्म, संप्रदाय और मजहब अंधविश्वास पर आधारित हैं। दुनिया को ठगने का यह सर्वोत्तम उपाय है। जो साधु-संत-संन्यासी, मुनि, पादरी, मौलवी आदि पवित्र और सत्यनिष्ठ हैं, उनके दुख का अनुमान मैं लगा सकता हूं लेकिन उनसे मेरी शिकायत यह भी है कि ऐसे मामलों पर वे चुप्पी क्यों साधे रहते हैं? वे इन पाखंडियों के खिलाफ अपना मुंह क्यों नहीं खोलते? क्या वे अपने आप से डरे हुए हैं?

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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