By अंकित सिंह | May 27, 2026
बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है। न्यायालय ने कहा कि एसआईआर का संचालन निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने व्यवस्था दी कि यह नहीं कहा जा सकता कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का प्रयोग करके अपने वैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर काम किया है।
पिछले वर्ष 12 अगस्त को न्यायालय ने मामले में अंतिम बहस शुरू की थी और तब कहा था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करना या हटाना निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है। निर्वाचन आयोग ने एसआईआर अभियान के तहत प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक किए थे। एसआईआर अधिसूचना के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें उस समय सूची में शामिल किसी व्यक्ति से अपना पैतृक संबंध साबित करना था।
एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए निर्वाचन आयोग ने कहा था कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण ‘‘राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) जैसी प्रक्रिया’’ है, जिसमें निर्वाचन आयोग नागरिकता की जांच कर रहा है, जबकि यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है।