अटल-आडवाणी से नड्डा-नबीन तक...45 सालों में किस-किस ने थामी कमल की कमान,अब 45 साल के युवा को सम्मान

By अभिनय आकाश | Jan 20, 2026

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में नितिन नबीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता इस अवसर पर उपस्थित थे। 45 वर्षीय नबीन निर्विरोध चुने गए और पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, जिससे वे इस पद पर आसीन होने वाले सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं। इससे पहले 15 दिसंबर को उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 36 में से 30 राज्य अध्यक्षों के चुनाव के बाद शुरू हुई, जो आवश्यक 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर गया। चुनाव कार्यक्रम और मतदाता सूची की घोषणा 16 जनवरी, 2026 को की गई। नामांकन प्रक्रिया सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच हुई, जिसमें नितिन नबीन के पक्ष में कुल 37 नामांकन पत्र प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित कई शीर्ष नेता प्रस्तावक थे। 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद से कई प्रभावशाली नेताओं ने संगठन की बागडोर संभाली है। प्रत्येक अध्यक्ष ने पार्टी की वैचारिक दिशा, संगठनात्मक संरचना और चुनावी रणनीति को अपने विशिष्ट तरीके से आकार दिया है। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में शुरुआती वर्षों से लेकर नितिन नबीन के नेतृत्व में वर्तमान नेतृत्व तक, भाजपा अध्यक्षों का सफर एक छोटी राजनीतिक इकाई से सदस्यता के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने तक पार्टी के विकास को दर्शाता है। 

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लालकृष्ण आडवाणी (1986 से 1991)

थोड़े कट्टर छवि के माने जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के नए अध्यक्ष बन गए। अब बीजेपी में नेतृत्व आडवाणी का था और नियंत्रण संघ का। इसलिए बीजेपी ने हिंदुत्व का रास्ता अख्तियार किया। इसके बाद ये रास्ता बनता हुआ खुद पर खुद बनता चला गया। 


मुरली मनोहर जोशी (1991 से 1993)

1991 का चुनाव बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर लड़ा और उसने 120 सीटें जीत लीं। इस साल बीजेपी देश की नंबर दो पार्टी बन गई। बीजेपी को लग गया कि सत्ता की संजीवनी चाहिए तो राम नाम से राष्ट्रवाद पर जाना होगा। इसी दौर में बीजेपी में मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष बन गए थे। दिसंबर 1991 में उनकी तिरंगा यात्रा निकली जिसका मकसद 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना था।

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लालकृष्ण आडवाणी (1993 से 1998)

हिंदुत्व और राम के नाम पर बीजेपी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी। 1984 में 2 सीटों पर सिमटी महज सात वर्षों में ही देश की नंबर दो पार्टी बन गई थी। ये सब हुआ लाल कृष्ण आडवाणी की बदौलत। साल 1993 में आडवाणी एक बार फिर बीजेपी के अध्यक्ष बनते हैं। आडवाणी को ये अंदाजा था कि पार्टी को नंबर टू से नंबर 1 बनाने और इससे भी आगे प्रधानमंत्री देने के लिए कोई उदार छवि वाला चेहरा चाहिए। 1995 में वाजपेयी जी से बगैर पूछे ही उनको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया और उनके इस ऐलान के बाद सब के सब हैरान रह गए थे। 

कुशाभाऊ ठाकरे (1998 से 2000)

अटल जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही। इसी दौर में भारतीय जनता पार्टी में पितृ पुरुष कहे जाने वाले कुशाभाऊ ठाकरे की बीजेपी के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी होती है। मध्यप्रदेश में बीजेपी को मजबूत बनाने में कुशाभाऊ ठाकरे का बड़ा योगदान भी माना जाता है। 

बंगारू लक्ष्मण (2000 से 2001)

2000 में आंध्र प्रदेश से आने वाले बंगारू लक्ष्मण बीजेपी के अध्यक्ष बनाए जाते हैं। लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण तहलका कांड में फंसते हैं जिसके बाद न सिर्फ उनकी कुर्सी गई बल्कि पार्टी की छवि पर भी सवाल उठा। 

जेना कृष्णमूर्ति  (2001 से 2002)

बंगारू लक्ष्मण के हटने के बाद 2001 से 2002 तक जेना कृष्णमूर्ति रहे।

वेंकैया नायडु (2002 से 2004)

भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति और 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे वेंकैया नायडू को साल 2002 में  भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है। 

लालकृष्ण आडवाणी (2004 से 2006)

साल 2004 में इंडिया शाइनिंग के बुरी तरह फेल होने के बाद एक बार फिर से बीजेपी की कमान लालकृष्ण आडवाणी के हाथों में आ जाती है। लेकिन आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी को 2009 के चुनाव में भी शिकस्त ही मिलती है। 

इस दौरान बीजेपी ने राजनाथ सिंह से लेकर नितिन गडकरी तक अपने अध्यक्ष बदले। लेकिन पार्टी में बड़ा बदलाव मोदी लेकर आए। जिनके नाम और छवि पर बीजेपी पूर्ण बहुमत पाने में कामयाब हो पाई। 

जेपी नड्डा 

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव 20 जनवरी को हुआ और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की इस दिन से अगले तीन साल के लिए पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी हुई। जेपी नड्डा को 17 जून 2019 को पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। 

नितिन नबीन कौन हैं?

नितिन नबीन बिहार के एक वरिष्ठ भाजपा नेता हैं जिनकी राजनीति में गहरी पकड़ है। पटना में जन्मे नितिन नबीन, दिवंगत नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं, जो भाजपा के एक सम्मानित नेता और पूर्व विधायक थे। पिता के असामयिक निधन के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधि नितिन नबीन को राज्य में भाजपा के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक माना जाता है। 2006 में उपचुनाव में जीत के बाद, उन्होंने 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते हैं। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में नबीन ने बांकीपुर से निर्णायक जीत हासिल की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 51,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। उनकी लगातार चुनावी सफलता ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। वर्तमान में, नबीन बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में सड़क निर्माण और शहरी विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि भाजपा और जेडीयू के गठबंधन को संभालने और एनडीए की चुनावी जीत में योगदान देने का श्रेय नबीन को ही दिया जाता है। बिहार के अलावा, नबीन छत्तीसगढ़ में भाजपा के प्रभारी भी रह चुके हैं, जो पार्टी के राष्ट्रीय ढांचे में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

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