मथुरा, काशी, सिविल कोड से लेकर नूपुर शर्मा के बयान तक, जानें जमीयत उलेमा-ए हिंद की 2 दिवसीय बैठक में क्या-क्या हुआ?

By अभिनय आकाश | May 30, 2022

देश में जारी ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के मुद्दे के बीच उत्तर प्रदेश के देवबंद में मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया। दो दिन तक चले इस बैठक में कई तरह के प्रस्ताव लाए गए और जिस तरह के कानूनी मुकदमे लगातार आ रहे हैं, प्लेसेज ऑफ वर्सिप एक्ट को लगातार चुनौती दी जा रही है। इन सभी मुद्दों को लेकर चर्चा की गई। ज्ञानवापी श्रृंगार गौड़ी मंदिर विवाद पर क्या रुख अख्तियार करना है इसको लेकर भी सम्मेलन में धर्मगुरुओं की तरफ से कई अहम निर्णय लिए गए। 

मौलाना मदनी ने कहा कि आज हालत यह हो गए हैं कि लोग हमारे देश में ही हमसे पूछते हैं कि हमारा वतन कौन सा है।’’ उन्होंने दावा किया, हमें अपने ही देश में अजनबी बना दिया गया है। जमीयत प्रमुख ने दावा किया, देश में मुसलमानों का चलना दूभर कर दिया गया है और बात अखंड भारत बनाने की की जाती है।’मौलाना महमूद मदनी ने रविवार को कहा कि जो लोग मुसलमानों से देश छोड़ने की बात कहते हैं वे खुद देश छोड़कर चले जाएं।

इसे भी पढ़ें: सरकार के संरक्षण में बहुसंख्यक समुदाय के दिमाग में जहर घोला जा रहा है: जमीयत

11 अलग-अलग प्रस्ताव पारित किए 

अधिवेशन में 11 अलग-अलग प्रस्ताव पारित किए गए जिनमें ‘इस्लामोफ़ोबिया’ देश के हालात, शिक्षा, ‘इजराइल-फलस्तीन’ मुद्दा, ज्ञानवापी मस्जिद,शाही ईदगाह पर विवाद और समान नागरिक संहितासमेत अन्य शामिल हैं।

संगठन ने अधिवेशन के दूसरे दिन वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह तथा समान नागरिक संहिता पर प्रस्ताव पारित किए और एक घोषणापत्र जारी कर सभी मुसलमानों को डर, निराशा और भावुकता से दूर रहने तथा अपने भविष्य की बेहतरी के लिए काम करने की सलाह दी।

प्रस्ताव में कहा गया है, “बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद,मथुरा की ऐतिहासिक ईदगाह और दीगर (अन्य) मस्जिदों के खिलाफ़ इस समय ऐसे अभियान जारी हैं, जिससे देश में अमन शांति और उसकी गरिमा एवं अखंडता को नुकसान पहुंचा है।” इसमें आरोप लगाया गया है, “अब इन विवादों को उठाकर सांप्रदायिक टकराव और बहुसंख्यक समुदाय के वर्चस्व की नकारात्मक राजनीति के लिए अवसर निकाले जा रहे हैं। 

प्रस्ताव में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 और रामजन्म भूमि व बाबरी मस्जिद विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया गया है। वहीं, समान नागरिक संहिता से संबंधित प्रस्ताव में संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है और इस पर चिंता व्यक्त की गई है। 

प्रस्ताव के मुताबिक, मुस्लिम पर्सनल कानून में शामिल शादी, तलाक़, ख़ुला (बीवी की मांग पर तलाक़), विरासत आदि के नियम इस्लाम धर्म के आदेशों का हिस्सा हैं जो कुरान और हदीस (पैंगबर मोहम्मद की शिक्षाओं) से लिए गए हैं। इसमें कहा गया है, “उनमें किसी तरह का कोई बदलाव या किसी को उनका पालन करने से रोकना इस्लाम में स्पष्ट हस्तक्षेप और भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में दी गई गारंटी के खिलाफ़ है।” 

प्रस्ताव में कहा गया है, “ जमीयत उलेमा-ए-हिंद का यह सम्मेलन स्पष्ट कर देना चाहता है कि कोई मुसलमान इस्लामी क़ायदे क़ानून में किसी भी दख़ल अंदाज़ी को स्वीकार नहीं करता।” इसमें यह भी कहा गया है कि अगर सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने की कोशिश करेगी तो संविधान के दायरे में रहकर इसे रोकने की कोशिश की जाएगी। 

अधिवेशन में इस्लाम के अंतिम पैंगबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के लिए भाजपा नेता नूपुर शर्मा की निंदा भी की गई है और मांग की गई कि “सरकार जल्द से जल्द ऐसा कानून बनाए जिससे मौजूदा कानून-व्यवस्था की अराजकता खत्म हो, इस तरह के शर्मनाक अनैतिक कृत्यों पर अंकुश लगे और सभी धर्मों के महापुरुषों का सम्मान हो।”  

प्रमुख खबरें

Dharmendra को Padma Vibhushan, बेटे Sunny-Bobby नहीं, Hema Malini ने लेंगी National Award

ट्रेन में भरकर जा रहे थे पाकिस्तानी सैनिक, तभी हुआ धमाका, उड़े चिथड़े

Beauty Tips: उम्र को कहें Goodbye! ये 3-Step Skin Care Routine देगा 10 साल छोटा Youthful Look

Jaisalmer में 300 गायों के शवों का अंबार, Dumping Yard में दिखा लापरवाही का Shocking मंजर