Famous Krishna Temple: Puri Jagannath से Bhalka Tirth तक, जानिए श्रीकृष्ण के चमत्कारी Temples का रहस्य

By अनन्या मिश्रा | Sep 03, 2026

जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 04 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दौरान देश के कृष्ण मंदिरों में एक खास तरह की रौनक और उमंग देखने को मिलती है। श्रीकृष्ण को समर्पित हर मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खासियत है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक भगवान श्रीकृष्ण के खूबसूरत, विशाल और प्राचीन मंदिर हैं। ऐसे में अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी के मौके पर इन मंदिरों के दर्शन करना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। भगवान कृष्ण के इन चमत्कारी मंदिरों में दर्शन मात्र से किस्मत बदल जाती है।

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बांके बिहारी मंदिर

वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया था। वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर फेमस और प्रीचीन है। यहां पर श्रीकृष्ण को बांके बिहारी कहा जाता है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर में मंगला आरती होती है, फिर रात 2 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खुलते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मंगला आरती साल में एक बार होती है। श्रीकृ्ष्ण के जन्म के बाद यहां पर भक्तों को कपड़े, खिलौने और अन्य दूसरी चीजें बेची जाती हैं।

द्वारकाधीश मंदिर मथुरा

द्वारकाधीश मंदिर मथुरा का दूसरा सबसे फेमस मंदिर है। इस मंदिर में श्रीकृ्ष्ण के काले रंग की प्रतिमा की पूजा होती है। लेकिन यहां पर राधा रानी की मूर्ति सफेद रंग की है। प्राचीन मंदिर होने की वजह से इसकी वास्तुकला भी भारत की प्राचीन वास्तुकला से प्रेरित है। जन्माष्टमी के पर्व पर यहां खास रौनक देखने को मिलती है। यहां पर इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती है।

श्रीकृष्ण मठ मंदिर

यह कर्नाटक का सबसे फेमस मंदिर है। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा खिड़की के 9 छिद्रों से की जाती है। यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है। वहीं जन्माष्टमी पर यहां पर विशेष रौनक देखने को मिलती है। पूरे मंदिर को लाइट्स और फूलों से सजाया जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर दर्शन के लिए आपको 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है।

जगन्नाथ पुरी

पुरी में स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। जन्माष्टमी के मौके पर यहां रौनक देखने लायक होती है। वहीं यहां की रथ यात्रा का विशेष महत्व होता है। रथ यात्रा में हिस्सा लेने से लिए देश-विदेश से भक्त पुरी आते हैं। रथ यात्रा के लिए तीन रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे आगे बलराम जी का रथ, फिर देवी सुभद्रा का रथ और अंत में भगवान श्रीकृष्ण का रथ चलता है।

बेट द्वारका मंदिर

गुजरात में एक और फेमस मंदिर है, जिसको बेट द्वारका के नाम से जानते हैं। इसका नाम भेंट द्वारका है, लेकिन गुजरात में इसको बेट द्वारका कहा जाता है। इस नगरी का नाम दो कारण से भेंट पड़ा। मान्यता है कि इस जगह पर भगवान श्रीकृष्ण की मित्र सुदामा से भेंट हुई थी। इस मंदिर में श्रीकृष्ण और सुदामा की पूजा होती है। जब सुदामा श्रीकृष्ण से भेंट करने आए थे, तो अपने साथ चावल की एक पोटली लाए थे। इन चावलों को खाकर कृष्ण जी ने सुदामा की दरिद्रता को दूर किया था। इस वजह से आप भी यहां पर चावल दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि यहां पर चावलों का दान करने से जातक कई जन्मों तक गरीब नहीं होता है।

सांवलिया सेठ मंदिर

भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर काफी फेमस है। यहां वह व्यापारी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर बनाने के लिए आते हैं। जिनको व्यापार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा होता है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित इस मंदिर का संबंध मीराबाई से बताया जाता है। मीरा के गिरधर गोपाल को बिजनेस पार्टनर होने के कारण सांवलिया सेठ के नाम से भी जाना जाता है। यह सांवलिया सेठ ही मीराबाई के गिरधर गोपाल हैं।

गुरु वायूर मंदिर

पीएम नरेंद्र मोदी फिर सत्ता में आने के बाद सबसे पहले 8 जून को को यहां गुरु वायूर मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। केरल के इस मंदिर का संबंध गुजरात से माना जाता है। गुरु वायूर मंदिर में श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है। वहीं मंदिर में विष्णु भगवान के 10 अवतारों को भी दिखाया गया है। गुरु वायूर मंदिर को दक्षिण की द्वारका और भूलोक के बैकुंठ के नाम से भी जाना जाता है। दिन में दो बार मंदिर में भक्तों के लिए फ्री में भंडारे की व्यवस्था है। वहीं यहां पर एकादशी का पर्व शिवेली बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस मंदिर का नाम पवनदेव वायु, देवताओं के गुरु बृहस्पति और ऊर यानी पृथ्वी के नाम से मिलकर बना है।

भालका तीर्थ

सोमनाथ में स्थित भालका तीर्थ वह जगह है, जहां पर पेड़ के नीचे ध्यान मग्न बैठे भगवान श्रीकृष्ण को शिकारी द्वारा हिरण के भ्रम में तीर मार दिया गया था। भालका तीर्थ वहीं स्थान है, जहां पर श्रीकृष्ण ने पृथ्वी को छोड़ दिया था और वह स्वर्ग चले गए थे। इस जगह को कपिला, हीरान और सरस्वती नदी का संगम कहा जाता है। श्रीकृष्ण के साथ ही उस बरगद के पेड़ को यह मंदिर समर्पित है।

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